नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बेलगाम कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर अब हर घर की रसोई और बजट पर दिख रहा है। रुपया भी डॉलर के मुकाबले 93.8 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक गिर गया है, जिससे महंगाई की मार और गहरी हो गई है।
गर्मी के मौसम में राहत देने वाले एयर कंडीशनर (AC) अब आपकी जेब पर भारी पड़ रहे हैं। कॉपर, एल्यूमीनियम और स्टील जैसी धातुओं की कीमतों में उछाल के कारण AC की कीमतों में 5 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। कंपनियों ने अपनी लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल दिया है, जिससे नया AC खरीदने का सपना मिडिल क्लास के लिए महंगा हो गया है।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी अब पहले जैसी सस्ती नहीं रही। कंपनियों ने अब डिस्काउंट की रणनीति छोड़कर मुनाफे पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके चलते प्लेटफॉर्म फीस में 24 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। ईंधन और संचालन खर्च बढ़ने से अब एक मामूली ऑर्डर भी महीने के कुल बजट में बड़ा अंतर पैदा कर रहा है।
एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) है, जो 85 फीसदी तक महंगा हो गया है। फ्यूल सरचार्ज जुड़ने से एयर टिकटों के दाम आसमान छू रहे हैं। वहीं, कमजोर रुपये के कारण विदेश यात्रा भी 5 से 10 फीसदी महंगी हो गई है। होटल से लेकर शॉपिंग तक, डॉलर में भुगतान करना अब भारतीय पर्यटकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। स्टील और रबर महंगे होने का असर सीधे ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ रहा है। चूँकि कमर्शियल वाहन सप्लाई चेन की रीढ़ हैं, इसलिए इनके महंगे होने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में भी परोक्ष रूप से वृद्धि हो रही है।
प्रीमियम पेट्रोल में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने आम आदमी की परेशानी और बढ़ा दी है। रिजर्व बैंक (RBI) के सामने अब बड़ी चुनौती है कि बढ़ती महंगाई को कैसे नियंत्रित किया जाए, जबकि विकास दर (Growth) को भी बनाए रखना जरूरी है।
निष्कर्ष: महंगाई अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि हकीकत है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में यही तेजी बनी रही, तो लोगों को अपने खर्चों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ेगा। आने वाले महीनों में उपभोक्ता मांग में कमी और जीवनशैली के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
| सेक्टर / प्रोडक्ट | बढ़ोतरी (लगभग) | मुख्य कारण | | :--- | :--- | :--- | | AC | 5% - 15% | कच्चा माल (धातुएं) महंगा | | फूड डिलीवरी | ~24% | बढ़ी हुई प्लेटफॉर्म फीस | | एयर ट्रैवल | अतिरिक्त सरचार्ज | ATF में 85% उछाल | | विदेश यात्रा | 5% - 10% | रुपये की कमजोरी (93.8/$) | | ऑटो (कमर्शियल) | ~1.5% | इनपुट कॉस्ट में वृद्धि | | प्रीमियम पेट्रोल | ₹2/लीटर | जियोपॉलिटिकल तनाव |
Prices on the rise everywhere!
— ET NOW (@ETNOWlive) March 23, 2026
From ACs and air travel to food delivery and fuel; cost pressures are building across sectors.
How long before this starts hitting demand and consumers pull back?#Pricehike #Zomato #ATF #Fuel #Travel #AutoIndustry pic.twitter.com/HReCSxW2ex
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