मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष का वैश्विक असर लंबे समय तक रहने की आशंका है, लेकिन भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया कि जिस तरह कोरोना काल में भारत ने एकजुटता दिखाई थी, अब उसी संकल्प के साथ इस वैश्विक संकट का सामना करना होगा।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघर्ष के नाम पर व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा डालना कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने के निरंतर प्रयास जारी हैं।
सरकार के लिए नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। पीएम मोदी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से भी 1,000 भारतीय, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं, सुरक्षित वापस लाए गए हैं।
कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। पीएम ने जानकारी दी कि भारत के पास वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जबकि 65 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त क्षमता पर काम चल रहा है। पाइन गैस और जग वसंत जैसे भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
देश की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसका पूरा ध्यान रखा गया है। प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि देश में अनाज, खाद और उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है। किसानों को किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी और खरीफ फसल की बुवाई का कार्य सुचारू रूप से जारी है।
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले दशक में भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। 250 गीगावाट बिजली उत्पादन के साथ-साथ रेलवे का विद्युतीकरण और 15,000 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन देश की ईंधन पर निर्भरता को कम कर रहा है। यदि रेलवे का विद्युतीकरण न हुआ होता, तो भारत को प्रति वर्ष 180 करोड़ लीटर अतिरिक्त डीजल की आवश्यकता पड़ती।
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार, उद्योग और नागरिक मिलकर इस संकट का सामना करेंगे। सुरक्षा एजेंसियों को तटीय, सीमा और साइबर सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहने को कहा गया है।
अंत में, प्रधानमंत्री ने दोहराया कि कूटनीति, संयम और एकजुटता ही इस जटिल अंतरराष्ट्रीय विवाद का एकमात्र स्थाई समाधान है। भारत शांति स्थापना के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ सक्रिय संवाद बनाए हुए है।
#WATCH पश्चिम एशिया संघर्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, इस युद्ध से दुनिया में जो मुश्किल हालात बने हैं, उनका असर लंबे समय तक रहने की संभावना है, इसलिए हमें तैयार रहना चाहिए और एकजुट रहना चाहिए। हमने COVID के समय में एकता के साथ ऐसी चुनौतियों का सामना किया है और अब हमें… pic.twitter.com/DcAl3YgPXZ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 23, 2026
एयरफोर्स का गद्दार गिरफ्तार: पाकिस्तान को बेच रहा था फाइटर जेट्स और मिसाइलों का सीक्रेट
मुझे पंत पर पूरा भरोसा है : संजीव गोयनका का बड़ा बयान, LSG की भविष्य की योजनाएं हुई साफ
बिहार बोर्ड 12वीं का रिजल्ट आज दोपहर 1:30 बजे, मुजफ्फरपुर के छात्र के टॉप करने की चर्चा
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच महासंग्राम का ऐलान, गिल-पंत के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
मुजफ्फरपुर में झूले पर खूनी जंग: नकाबपोशों ने बरसाए पत्थर, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा
न्यूयॉर्क के ला गार्डिया एयरपोर्ट पर भीषण हादसा: रनवे पर प्लेन और फायर ट्रक की जोरदार टक्कर, मची अफरा-तफरी
सांबा में आधी रात को जोरदार धमाका: थर्राया इलाका, घरों के शीशे टूटे, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
अब्बू हम फर्स्ट आ गए : बिहार बोर्ड की टॉपर रोशनी की आंखों से छलके खुशी के आंसू
PSL 2026: टूर्नामेंट से ठीक पहले बड़ा बदलाव, बिना दर्शकों के सिर्फ दो शहरों में खेले जाएंगे मुकाबले
अगर पैसा पूरा तो डेटा आधा क्यों? मोबाइल रिचार्ज के अदृश्य खेल पर राघव चड्ढा ने संसद में घेरी टेलीकॉम कंपनियां