अगर पैसा पूरा तो डेटा आधा क्यों? मोबाइल रिचार्ज के अदृश्य खेल पर राघव चड्ढा ने संसद में घेरी टेलीकॉम कंपनियां
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मोबाइल रिचार्ज करवाते समय हम सभी ने कभी न कभी गौर किया होगा कि रात के 12 बजते ही हमारा बचा हुआ डेटा गायब हो जाता है। आम आदमी की इस परेशानी को अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने पुरजोर तरीके से उठाया है। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की डेली डेटा लिमिट नीति को ग्राहकों के साथ एक बड़ा धोखा करार दिया है।

रात 12 बजे डेटा गायब होना कोई इत्तेफाक नहीं

संसद में अपनी बात रखते हुए चड्ढा ने कहा कि कंपनियां 1.5GB से 3GB तक के डेली प्लान बेचती हैं, जिसके लिए ग्राहक पूरा पैसा चुकाता है। लेकिन अगर आप उस डेटा का उपयोग नहीं कर पाते, तो आधी रात होते ही वह डेटा जीरो हो जाता है। उन्होंने इसे कंपनियों की सोची-समझी रणनीति बताया, जिसका मकसद या तो ग्राहक को बेमतलब डेटा इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करना है या फिर उसका पैसा डूबोना है।

राघव चड्ढा ने सरकार के सामने रखीं ये 3 मांगें

सांसद ने सदन के जरिए दूरसंचार विभाग और रेगुलेटरी अथॉरिटी के सामने तीन ठोस प्रस्ताव पेश किए हैं, जिनसे करोड़ों यूजर्स को राहत मिल सकती है:

  1. डेटा कैरी-फॉरवर्ड सुविधा: यदि आज का डेटा बच गया है, तो उसे बेकार करने के बजाय अगले दिन की लिमिट में जोड़ा जाना चाहिए।
  2. बिल में एडजस्टमेंट: जो यूजर अपने तय डेटा का कम इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अगले रिचार्ज में उचित डिस्काउंट मिलना चाहिए।
  3. डेटा ट्रांसफर की आजादी: डेटा को उपभोक्ता की डिजिटल प्रॉपर्टी माना जाए। जिस तरह हम पैसे ट्रांसफर करते हैं, उसी तरह बचा हुआ डेटा दोस्तों या परिवार को भेजने की सुविधा मिलनी चाहिए।

28 दिनों वाले अदृश्य गणित पर भी सवाल

राघव चड्ढा ने टेलीकॉम सेक्टर के 28 दिनों वाले रिचार्ज प्लान के गणित पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के चलते ग्राहकों को एक साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा कि रिचार्ज की अवधि खत्म होते ही इनकमिंग कॉल और मैसेज बंद करना उन लोगों के लिए बेहद घातक है, जो सिर्फ जरूरी संचार के लिए मोबाइल पर निर्भर हैं। चड्ढा का यह रुख टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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