तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब मध्य-पूर्व की सीमाओं को लांघकर यूरोप और आर्कटिक तक पहुँच गया है। डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर महत्वाकांक्षी और विवादास्पद योजना के बीच ईरान ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने वाशिंगटन और यूरोपीय संघ (EU) के बीच कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है।
ईरान का सुरक्षा कवच वाला ऑफर ईरान ने एक चौंकाने वाला प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि यूरोपीय संघ ग्रीनलैंड की रक्षा करने में असमर्थ है, तो वह ईरान से मदद मांग सकता है। तेहरान ने दावा किया है कि वह ग्रीनलैंड की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर अपना नियंत्रण चाह रहे हैं और इसके लिए उन्होंने यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है।
ट्रंप की दुखती रग पर वार राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने यह चाल सोच-समझकर चली है। ट्रंप लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि नाटो सहयोगी ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक मुद्दों पर अमेरिका का साथ दें। ईरान का यह ऑफर सीधे तौर पर ट्रंप की उन कमजोरियों पर चोट है, जो उनके और यूरोपीय सहयोगियों के बीच मतभेद पैदा कर सकती है। ईरान इस कदम से ट्रंप के समर्थकों और उनके सहयोगियों के बीच अविश्वास का बीज बो रहा है।
क्या है ग्रीनलैंड का असली विवाद? डोनाल्ड ट्रंप का पुराना सपना रहा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करे या उसे खरीदे। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का रणनीतिक नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें पहले ही इस प्रस्ताव को खारिज कर चुकी हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि यूरोप इस मामले में उनके साथ नहीं खड़ा हुआ, तो वे उन पर 10 से 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा ग्रीनलैंड के इस विवाद के अलावा, पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान ने पहले ही तेल व्यापार के सबसे अहम रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आक्रामक रुख अपनाया है। वहीं, ट्रंप की ओर से ईरान के प्रमुख तेल केंद्र खार्ग द्वीप पर हमले की धमकी ने स्थिति को और भी विस्फोटक बना दिया है।
यूरोप की दोहरी चुनौती यूरोपीय देश अब एक अजीब कशमकश में हैं। एक तरफ उन्हें ट्रंप के आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान के इस कूटनीतिक जले पर नमक छिड़कने वाले ऑफर से उन्हें नई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का डर सता रहा है। फिलहाल, नाटो देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है, जिससे यह इलाका वैश्विक भू-राजनीति का नया हॉटस्पॉट बन गया है।
Iran offer to PROTECT Greenland from Trump — ‘just ask… we’ll come’ pic.twitter.com/t0L7zqd2w0
— RT (@RT_com) March 21, 2026
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