राज्यसभा चुनाव में ‘अनादर’ पर कांग्रेस विधायक का बागी तेवर: आलाकमान को दी चुनौती
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बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव के बाद से ही हलचल तेज है। कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए महागठबंधन उम्मीदवार को वोट नहीं दिया था। अब नोटिस मिलने के बाद उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बगावत के पीछे की ठोस वजह बताई है।

सम्मान नहीं, तो समर्थन नहीं मनोज विश्वास ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल एक चुनाव तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार तय करते समय न तो प्रदेश के विधायकों की राय ली गई और न ही वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लिया गया। विश्वास के अनुसार, जब पार्टी में प्रदेश नेतृत्व का ही अपमान हो, तो वे उस फैसले के साथ खड़े नहीं हो सकते थे।

राहुल गांधी तक ले जाएंगे बात पार्टी द्वारा जारी अनुशासन के नोटिस पर विधायक ने कहा कि वे इसका जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, मैं अभी भी खुद को कांग्रेसी मानता हूं। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर प्रदेश स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई, तो वे दिल्ली कूच करेंगे और राहुल गांधी व राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर अपनी व्यथा रखेंगे।

उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर सवाल मनोज विश्वास ने पार्टी की टिकट वितरण शैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर जी-हुजूरी की संस्कृति पनप रही है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे। उनका यह रुख केवल अकेले उनका नहीं है, बल्कि विधायक सुरेंद्र प्रसाद और मनोहर प्रसाद सिंह का भी यही मानना है। इन तीनों विधायकों का एक साथ आना कांग्रेस आलाकमान के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।

अगला कदम क्या होगा? पार्टी ने बागी विधायकों से 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। मनोज विश्वास का कहना है कि वे जो भी जवाब देंगे, उसी पर अडिग रहेंगे। अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है कि वह इन विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी या फिर बीच का कोई रास्ता निकालते हुए पार्टी के भीतर मचे इस असंतोष को शांत करेगी।


(नोट: इसी बीच, एक बड़ी खबर यह भी है कि विधायक अनंत सिंह को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है, जिससे राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।)

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