ईरान को किसने भेजी रहस्यमयी मेडिकल मदद? दूतावास के पोस्ट डिलीट करने से बढ़ा सस्पेंस
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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच भारत से ईरान भेजी गई एक मेडिकल मदद ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा बटोर ली है। मानवता के नाम पर भेजी गई इस सहायता ने जहाँ भारत की उदारता को रेखांकित किया, वहीं अब एक रहस्यमयी मोड़ ले लिया है।

दूतावास का पोस्ट और अचानक खामोशी भारत स्थित ईरानी दूतावास ने शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी। इसमें उन्होंने दावा किया कि भारत के लोगों द्वारा भेजी गई मेडिकल सहायता की पहली खेप ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को मिल गई है। उन्होंने इसके लिए भारत के प्रति आभार भी जताया। लेकिन, कुछ ही घंटों बाद इस पोस्ट को अचानक डिलीट कर दिया गया।

कौन है मदद के पीछे? हैरानी की बात यह है कि सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने ईरान को आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई मदद नहीं भेजी है। वीडियो में दिख रहे कार्टन पर साफ लिखा है कि यह भारत की जनता द्वारा भेजी गई मेडिकल सहायता है। सरकार के शामिल न होने के बावजूद यह मदद किसने और कैसे भेजी, यह अब एक पहेली बन गई है। क्या यह किसी निजी संस्था का प्रयास था या कोई कूटनीतिक पेच?

स्ट्रैटेजिक रूट पर भारत को मिली राहत इस घटनाक्रम के बीच यह भी अहम है कि ईरान ने भारत के दो एलपीजी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से सुरक्षित गुजरने दिया है। युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते पर भारी तनाव है और दुनिया भर के जहाज वहां से गुजरने में डर रहे हैं। ईरान का यह रुख उसकी भारत के साथ पुरानी दोस्ती और कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है।

जंग की आग में झुलसता मिडिल ईस्ट मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने हालात नाजुक बना दिए हैं। 28 फरवरी को हुए हमले के बाद ईरान ने इजराइल और अमेरिकी बेस को निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में मिसाइलों की बौछार हो गई है। 20 दिनों से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने दुनिया भर में क्रूड ऑयल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है।

कूटनीति की नई मिसाल एक तरफ जहाँ पूरा क्षेत्र युद्ध की चपेट में है, वहीं भारत और ईरान के बीच का यह अनकहा तालमेल महत्वपूर्ण है। हाल ही में कोचीन में फंसे ईरानियों को सुरक्षित स्वदेश पहुंचाकर भारत ने भी अपना रुख स्पष्ट किया था। बहरहाल, मेडिकल मदद का रहस्य अभी भी बरकरार है कि आखिर उस सद्भावना का असली कर्ता-धर्ता कौन है।

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