इंदौर अग्निकांड: EV चार्जिंग, गैस सिलेंडर और डिजिटल लॉक ने कैसे घर को बनाया मौत का जाल
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इंदौर के ग्रेटर बृजेश्वर कॉलोनी में बुधवार तड़के हुई एक भयावह घटना ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की सुरक्षा और घर में तकनीक के इस्तेमाल पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। चार्जिंग पर लगी एक इलेक्ट्रिक कार में लगी आग ने देखते ही देखते पूरे तीन मंजिला मकान को श्मशान में बदल दिया।

आधी रात का खौफनाक मंजर

हादसा मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 3:30 बजे हुआ। घर में खड़ी टाटा पंच EV चार्ज हो रही थी, तभी चार्जिंग पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट हुआ और चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया। लिथियम-आयन बैटरी में हुई थर्मल रनअवे की प्रक्रिया ने आग को इतनी गति दी कि कुछ ही मिनटों में कार पूरी तरह जलकर खाक हो गई।

सीढ़ियां बनी मौत का रास्ता

आग ग्राउंड फ्लोर से शुरू होकर सीढ़ियों के रास्ते ऊपर की मंजिलों तक पहुंची। इस घर में रबर व्यवसायी मनोज पुगलिया का परिवार और बिहार से आए मेहमान सो रहे थे। कुल 12 लोगों में से 8 की मौत हो गई, जबकि 4 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मरने वालों में गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

गैस सिलेंडर और केमिकल बने फ्यूल

जांच में पता चला कि घर में रबर के व्यवसाय से जुड़े ज्वलनशील केमिकल्स और 10 से ज्यादा गैस सिलेंडर रखे थे। आग के संपर्क में आते ही एक के बाद एक सिलेंडर फटते चले गए, जिससे मकान का ढांचा ढह गया। केमिकल के कारण आग की तीव्रता सामान्य से 5 गुना अधिक थी, जिसने बचाव निकास (escape route) को पूरी तरह खत्म कर दिया।

डिजिटल लॉक: सुविधा या जानलेवा जाल?

इस हादसे का सबसे दुखद पहलू डिजिटल लॉक बने। आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति ठप होते ही घर के इलेक्ट्रॉनिक लॉक खुद-ब-खुद जाम हो गए। अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल सके और तकनीक उनकी सुरक्षा करने के बजाय मौत का जाल बन गई।

सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल

इलाकावासियों ने फायर ब्रिगेड के करीब एक घंटे देरी से पहुंचने का आरोप लगाया है। वहीं, राज्य सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए एक सख्त SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

क्या घर के अंदर EV चार्जिंग सुरक्षित है?

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा के प्रति जागरूकता कम है। 2022 से 2025 के बीच देश में 150 से ज्यादा EV फायर केस दर्ज हुए हैं। इंदौर का यह हादसा एक चेतावनी है कि घरों में EV चार्जिंग के लिए उचित वेंटिलेशन, फायर अलार्म और आपातकालीन निकास प्रणाली का होना अब अनिवार्य जरूरत बन गई है।

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