नई दिल्ली में आयोजित लीडर्स कॉन्फ्लुएंस में भविष्य के युद्धों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली के जनक डॉ. प्रह्लाद रामाराव और पूर्व वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया जैसे दिग्गजों ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों और भारत की तैयारियों पर मंथन किया।
डॉ. प्रह्लाद रामाराव ने स्पष्ट किया कि अब युद्ध के तरीके पूरी तरह बदलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की लड़ाई जमीन या आसमान से ऊपर उठकर अब स्पेस (अंतरिक्ष) में लड़ी जाएगी। युद्ध का मुख्य केंद्र सैटेलाइट्स होंगे, क्योंकि संचार और दुश्मन की निगरानी के लिए ये सबसे महत्वपूर्ण हैं। जो देश सैटेलाइट-टू-सैटेलाइट युद्ध में खुद को सुरक्षित रखते हुए दुश्मन को मात देगा, वही विजेता कहलाएगा। भारत फिलहाल ऐसे स्पेस प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहा है जो इस नई चुनौती का सामना कर सकें।
डॉ. राव के मुताबिक, अब महंगे हथियारों के बजाय कम लागत वाले ड्रोन, लेजर और माइक्रोवेव हथियारों की जरूरत है। भारत ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे सुरक्षा का खर्च कम हो और मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाए। उन्होंने जीत के लिए 8 क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बताया, जिनमें कमांड, कंट्रोल, इंटेलिजेंस और निगरानी सबसे सक्षम होने चाहिए।
वैश्विक तनाव पर बात करते हुए डॉ. राव ने भारत की भूमिका को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि यदि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ती है, तो भारत ही एकमात्र ऐसा भरोसेमंद देश है जो इसे रोक सकता है। वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर चलने वाला भारत शांति स्थापित करने में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए भारतीय सेना की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सेना ने इस ऑपरेशन में अपने लक्ष्यों को बेहद सटीकता के साथ हासिल किया, जो भारतीय रक्षा तैयारियों की मजबूती का प्रमाण है।
कार्यक्रम में IdeaForge के सीईओ अंकित मेहता ने बताया कि भारत की भौगोलिक विविधता—रेगिस्तान की भीषण गर्मी से लेकर सियाचिन की जमा देने वाली ठंड तक—हमारे ड्रोन तकनीक को और अधिक शक्तिशाली बना रही है। भारत ऐसे एडवांस ड्रोन विकसित कर रहा है जो हर कठिन मौसम और ऊंचाई पर सटीक वार कर सकें। भारत की यह तेजी से विकसित होती क्षमता अब दुनिया को हैरान कर रही है।
Satellites are about to be involved in war; the game is going to move from ground to air, and now to space, says Dr. Prahlada Ramarao, Architect behind India s Akash Surface-to-Air Missile System#RhythmOfTheNewWorldOrder #WIONWorldPulse pic.twitter.com/eRdsMJ8Gfp
— WION (@WIONews) March 18, 2026
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