राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों ने भी दिया बीजेपी का साथ, विपक्ष को लगा बड़ा झटका
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राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों ने देश की सियासत में हलचल मचा दी है। इस चुनाव में बीजेपी ने बिहार, ओडिशा और हरियाणा में कांग्रेस और विपक्ष के विधायकों को साधकर बड़ी जीत हासिल की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस के कई मुस्लिम विधायकों ने भी पार्टी लाइन से इतर जाकर बीजेपी का समर्थन किया।

ओडिशा और हरियाणा में हुई क्रॉस वोटिंग ओडिशा की बाराबती सीट से कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे को वोट दिया। वहीं, हरियाणा में कांग्रेस को अपने ही कुनबे से बड़ा झटका लगा। यहां पार्टी के 9 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिनमें मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इजरायल जैसे मुस्लिम विधायक भी शामिल रहे।

बिहार: बीजेपी की बिछाई बिसात में फंसा विपक्ष बिहार में बीजेपी ने अपनी कुशल रणनीति से सबको हैरान कर दिया। राज्यसभा की सीटों पर जीत के लिए बीजेपी को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी। कांग्रेस के तीन विधायक—सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। वहीं, आरजेडी के विधायक फैजल रहमान के न आने से बीजेपी के शिवेश राम की राह आसान हो गई।

कांग्रेस हुई सख्त, विधायकों को दिखाया बाहर का रास्ता विपक्षी खेमे में सेंधमारी से बौखलाई कांग्रेस अब एक्शन मोड में है। ओडिशा में पार्टी ने व्हिप का उल्लंघन करने के आरोप में सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथ गमांगो को निलंबित कर दिया है। हरियाणा में भी पार्टी ने व्हिप तोड़ने वाले विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है।

सांप निकल जाने के बाद लाठी पीट रही कांग्रेस? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। जिस तरह से बीजेपी ने विपक्षी एकता को दरकिनार कर मुस्लिम विधायकों को भी अपने पाले में किया है, उसने कांग्रेस की रणनीतिक विफलता को उजागर कर दिया है।

बीजेपी की चौतरफा जीत बीजेपी ने इस चुनाव में न केवल अपने सहयोगियों को जिताया, बल्कि विपक्षी दलों के वोट बैंक में भी सेंध लगाई। बिहार में नितिन नवीन, शिवेश राम से लेकर हरियाणा के संजय भाटिया और महाराष्ट्र के विनोद तावड़े तक, बीजेपी के प्रत्याशियों ने विपक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद जीत हासिल की। यह चुनाव विपक्षी दलों के लिए एकजुटता और अपने विधायकों को संभालने की एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

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