असम विधानसभा चुनाव 2026: क्या किंगमेकर बदरुद्दीन अजमल का सियासी सूर्य अस्त हो रहा है?
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असम की राजनीति में कभी किंगमेकर माने जाने वाले बदरुद्दीन अजमल अब अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में धुबरी सीट पर मिली करारी हार के बाद, अजमल के राजनीतिक ग्राफ में आई गिरावट ने उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजरें 2026 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं।

बीजेपी पर आक्रामक, सीएम को नसीहत द ग्रेट ब्रह्मपुत्र डायलॉग में अजमल काफी आक्रामक दिखे। उन्होंने बीजेपी को देश से भगाने का आह्वान किया और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए कहा, पहले इंसान बनिए, फिर लीडर। धर्म के नाम पर वोट मांगना बंद करें। दिलचस्प बात यह है कि घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने चौंकाते हुए कहा, अगर बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ होती है, तो शूट एट साइट का आदेश दें।

परिसीमन ने बदली सियासी बिसात असम में हुए परिसीमन (Delimitation) ने राज्य की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। मुस्लिम बहुल सीटों का भूगोल बदल गया है और ऐसी सीटों की संख्या घटकर अब करीब 23 रह गई है। इसका सीधा असर अजमल की पार्टी AIUDF पर पड़ना तय माना जा रहा है। यही कारण है कि अजमल अब 126 में से केवल 35 सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि वे अपनी बची-खुची पकड़ को बचा सकें।

कांग्रेस से दूरी और बी-टीम का आरोप अजमल के लिए सबसे बड़ी पहेली कांग्रेस के साथ उनका बिगड़ता रिश्ता है। गौरव गोगोई के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन असोम सनमिलितो मोर्चा ने AIUDF को दरकिनार कर दिया है। कांग्रेस को डर है कि अजमल के साथ गठबंधन से बीजेपी को ध्रुवीकरण का मौका मिल जाएगा। बदले में अजमल ने कांग्रेस को ही बीजेपी की बी-टीम करार दे दिया है।

विकास का दांव, क्या जनता देगी साथ? अपनी पुरानी मुस्लिम नेता वाली छवि से बाहर निकलने के लिए अजमल ने शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और सम्मान का नया नारा दिया है। वे हिंदू और महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर खुद को सर्व-समावेशी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, क्या जनता इसे स्वीकार करेगी, यह बड़ा सवाल है।

अस्तित्व की निर्णायक लड़ाई अजमल के लिए 2026 का चुनाव केवल सीटों की जीत-हार नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की परीक्षा है। अगर वे इस बार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं, तो असम की राजनीति में उनका किंगमेकर वाला रसूख इतिहास बन सकता है। 4 मई 2026 को आने वाले नतीजे बताएंगे कि क्या अजमल ने अपनी जमीन वापस पा ली है या वे बदलते समीकरणों की भेंट चढ़ गए हैं।

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