ईरान ने भारत से मिली मदद का पोस्ट क्यों डिलीट किया? रहस्य बरकरार
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इजरायल और अमेरिका के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर भारत से मिली चिकित्सा सहायता के लिए आभार जताया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उस पोस्ट को हटा दिया गया।

इस अचानक आई यू-टर्न ने कूटनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या था पोस्ट में दावा? ईरानी दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो साझा किया था। इसमें दावा किया गया था कि भारत के लोगों द्वारा भेजी गई मेडिकल सहायता की पहली खेप ईरान पहुंच चुकी है और इसे ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंप दिया गया है। पोस्ट में भारतीयों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया था।

वीडियो में कुछ पैकेट दिखाए गए थे, जिन पर यह संदेश लिखा था कि यह सामग्री भारत के लोगों की ओर से है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सहायता नहीं भेजी गई है।

गलतफहमी या कूटनीतिक पेच? पोस्ट डिलीट होने के बाद स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट है। विशेषज्ञ इसे एक बड़ी गलतफहमी या कूटनीतिक असमंजस मान रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ दूतावास ने सरकारी सहायता का दावा किया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने भारतीय नागरिकों से आर्थिक मदद (डोनेशन) के लिए एक अलग अभियान भी चला रखा है, जिसके लिए बैंक खाते की जानकारी साझा की गई है।

युद्ध के साये में ईरान का मानवीय संकट ईरान इस समय अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष में देश को न केवल सैन्य बल्कि बड़े पैमाने पर नागरिक नुकसान उठाना पड़ा है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग घायल हैं।

स्वास्थ्य प्रणाली पर गहरा असर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। इससे न केवल मेडिकल स्टाफ की कमी हो गई है, बल्कि बुनियादी ढांचा भी ध्वस्त हो रहा है।

अस्पतालों पर बढ़ते दबाव के बीच डॉक्टरों के लिए घायलों को बचाना एक चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि संघर्ष के दौरान तेल ठिकानों में लगी आग से फैला जहरीला धुआं आम लोगों के लिए नई सांस संबंधी महामारियों को जन्म दे सकता है।

वर्तमान में यह संघर्ष न केवल ईरान की सीमाओं को, बल्कि वहां की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था और पर्यावरण को भी तबाह कर रहा है। ऐसे में भारत से मदद की चर्चा और फिर उसका डिलीट होना ईरान की बढ़ती हताशा को भी दर्शा रहा है।

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