असम में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने कांग्रेस को एक और बड़ा झटका दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। यह राजनीतिक घटनाक्रम सीधे तौर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के उस विवादास्पद अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस को हिंदू नेताओं से मुक्त करने का ऐलान किया था।
हिमंता का खुला चैलेंज हुआ सच? कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया था कि कांग्रेस के 70% नेता उनके संपर्क में हैं और वे जल्द ही पार्टी छोड़ देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस के सभी हिंदू नेताओं को अपने पाले में लाना है। प्रद्युत बोरदोलोई का शामिल होना इसी रणनीति की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
कौन हैं प्रद्युत बोरदोलोई? बोरदोलोई असम की राजनीति में एक कद्दावर नाम हैं। कॉटन कॉलेज और जेएनयू से शिक्षित बोरदोलोई 2016 तक मार्गेरिटा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा के साथ उनकी पुरानी पहचान और कार्यशैली में समानताएं भी उनके इस फैसले के पीछे की एक बड़ी वजह हो सकती हैं।
कांग्रेस के लिए क्यों है यह बड़ा संकट? 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा सांगठनिक नुकसान है। हाल के दिनों में पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के अलावा तीन विधायक भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बार-बार हो रहे इस पलायन ने कांग्रेस की असम इकाई के भीतर नेतृत्व संकट को और गहरा कर दिया है।
क्या है हिमंता की मास्टर स्ट्रेटजी ? हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति दोतरफा है। पहली, कांग्रेस को सांगठनिक रूप से कमजोर करना और दूसरी, उसे हिंदू नेतृत्व से खाली करना। प्रद्युत बोरदोलोई को पार्टी में शामिल करते हुए मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि बोरदोलोई को आगामी विधानसभा चुनाव लड़वाने के लिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व से सिफारिश की जाएगी।
2015 का इतिहास दोहराने की तैयारी? असम की राजनीति में प्रद्युत बोरदोलोई का जाना 2015 की याद दिलाता है, जब हिमंता ने स्वयं कांग्रेस छोड़कर 9 विधायकों के साथ भाजपा का रुख किया था। उसी के परिणामस्वरूप 2016 में भाजपा पहली बार राज्य की सत्ता पर काबिज हुई थी। अब वही इतिहास दोहराते हुए भाजपा एक बार फिर विपक्ष के हिंदू नेतृत्व को पूरी तरह खत्म करने के अभियान पर है।
प्रद्युत बोरदोलोई का जाना केवल एक नेता का पाला बदलना नहीं है, बल्कि यह असम में कांग्रेस के घटते सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव का बड़ा संकेत है। क्या कांग्रेस इस लीडरशिप वैक्यूम से उबर पाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
#WATCH | Delhi | Assam CM Himanta Biswa Sarma says, There are a lot of people like Navajyoti Talukdar and others who will join (the BJP) in Guwahati...We are going to clear our party list for candidates this evening...Other people will join in the next two to three days in Assam… pic.twitter.com/VqH7cpeWU5
— ANI (@ANI) March 18, 2026
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