ईरान के सबसे बड़े गैस भंडार पर हमला, दुनिया की धड़कनें बढ़ीं; क्या अब छिड़ने वाला है एनर्जी वॉर ?
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स (South Pars) गैस फील्ड को निशाना बनाया। यह पहली बार है जब ईरान की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ माने जाने वाले गैस ठिकानों पर सीधा हमला किया गया है। इस घटना के बाद पूरी दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

हमले से क्यों भड़का है ईरान? साउथ पार्स ईरान की अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। अमेरिकी सेना द्वारा फारस की खाड़ी में ईरान के मुख्य तेल टर्मिनल खार्ग आइलैंड को निशाना बनाए जाने के बाद, अब गैस फील्ड पर हमला ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति माना जा रहा है। ईरानी मीडिया ने बुशहर प्रांत के असालुयेह में स्थित गैस फैसिलिटीज में आग और धुएं के गुबार की पुष्टि की है।

साउथ पार्स: दुनिया का ऊर्जा खजाना यह गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है, जो ईरान और कतर के बीच विभाजित है। ग्लोबल गैस भंडार का करीब 10 से 15 फीसदी हिस्सा इसी इलाके में है। जानकारों के मुताबिक, इस फील्ड में 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस मौजूद है, जो पूरी दुनिया की 13 साल की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। यही कारण है कि इस पर हमले को वैश्विक ऊर्जा संकट का संकेत माना जा रहा है।

ईरान की खुली धमकी: अब पड़ोसी देशों पर संकट? इस हमले के जवाब में ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए खाड़ी देशों को चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य कमांडरों ने धमकी दी है कि अगर हमले जारी रहे, तो वे सऊदी अरब की सामरेफ रिफाइनरी, यूएई के अल हसन गैस फील्ड और कतर के पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को निशाना बनाएंगे। इस धमकी ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है।

कतर की चिंता और वैश्विक राजनीति कतर ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। उनका तर्क है कि ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हमला न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। कतर ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

बाजार में हलचल: कच्चे तेल के दाम उछले ईरान के गैस भंडार पर हमले की खबर का असर शेयर और कमोडिटी मार्केट पर तुरंत दिखा। बुधवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया। तेल की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आम जनता की जेब पर भारी पड़ सकती हैं।

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