केदारनाथ यात्रा के लिए एफिडेविट अनिवार्य: सारा अली खान के बहाने छिड़ी सियासी जंग
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उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को लेकर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के एक फैसले ने देश भर में बहस छेड़ दी है। समिति ने 47 मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को विनियमित करने और उन्हें दर्शन के लिए शपथ पत्र (Affidavit) देने का नियम लागू किया है। यह कदम अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

कंगना रनौत का समर्थन इस मुद्दे पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने फैसले का समर्थन करते हुए कहा, वहां जो भी हैं, सब सनातनी हैं। जो सनातनी है उसे सच्चाई लिखने या शपथ पत्र देने में कैसा डर? उन्होंने इसे धार्मिक अनुशासन के नजरिए से सही ठहराया है।

पप्पू यादव ने जताया विरोध दूसरी ओर, पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे आस्था के खिलाफ बताया है। पप्पू यादव का तर्क है कि प्रार्थना और उपासना व्यक्तिगत आस्था के विषय हैं। उन्होंने कहा, भारत में किसी भी धर्म के व्यक्ति का कहीं भी जाना परंपरा रही है, चाहे वह शिर्डी हो या अजमेर शरीफ। दर्शन के लिए प्रमाण पत्र मांगना भारत की संस्कृति नहीं है।

क्या हैं मंदिर समिति के नए नियम? बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय धार्मिक मर्यादाओं और आस्था को संरक्षित करने के लिए लिया गया है। नए नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

समिति का क्या है तर्क? मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी को बाहर करने के लिए नहीं, बल्कि मंदिरों की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए लिया गया है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि आस्था के आधार पर इस तरह के नियम समाज में दूरियां बढ़ा सकते हैं। फिलहाल, यह विषय सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर गरमाया हुआ है।

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