राहुल गांधी ने की भारत रत्न की मांग कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की वकालत की है। राहुल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सोशल मीडिया पर साझा किया है। अपने पत्र में राहुल ने कांशीराम को सामाजिक न्याय का योद्धा बताते हुए दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को मुख्यधारा में लाने के उनके संघर्षों को याद किया।
नेहरू का जिक्र कर चर्चा में राहुल सिर्फ पत्र ही नहीं, लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक विवादित बयान भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय जवाहरलाल नेहरू होते, तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। राहुल के इस बयान को सीधे तौर पर बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मायावती का पलटवार, कांग्रेस को दिखाया आईना राहुल गांधी की इन मांगों पर बसपा प्रमुख मायावती बुरी तरह भड़क उठीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए तीखे सवाल किए। मायावती ने कटाक्ष किया कि जिन्होंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न के लायक नहीं समझा और कांशीराम के निधन पर कांग्रेस सरकार रहते एक दिन का भी शोक घोषित नहीं किया, वे आज किस मुंह से ऐसी बातें कर रहे हैं?
2027 की चुनावी बिसात और दलित वोट राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांशीराम का नाम अचानक चर्चा में आना महज संयोग नहीं है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दल दलित मतदाताओं को रिझाने की जुगत में हैं। दलित वोट बैंक सत्ता की चाबी माना जाता है, इसलिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, दोनों ही कांशीराम को अपना बताने की होड़ में हैं।
भाजपा भी दौड़ में शामिल केवल विपक्षी दल ही नहीं, सत्ताधारी भाजपा भी इस मामले पर मंथन कर रही है। भाजपा के भीतर भी कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठ रही है। पार्टी का एक धड़ा मानता है कि यदि मोदी सरकार कांशीराम को यह सम्मान देती है, तो दलितों का एक बड़ा तबका भाजपा के पाले में आ सकता है। अब देखना यह है कि यह राजनीतिक दांव-पेंच आगामी चुनावों में किसे कितना फायदा पहुंचाते हैं।
*भारत सरकार से सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक मान्यवर कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करता हूं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 15, 2026
यह सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान कांशीराम जी के साथ उस पूरे आंदोलन को श्रद्धांजलि होगी जिसने करोड़ों बहुजनों को हक़, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान… pic.twitter.com/XF9MGjcj4J
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