मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ा रक्षा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका ने ईरान के शाहेद ड्रोन की तर्ज पर अपना सस्ता और घातक कामिकाजे ड्रोन लुकास (LUCAS) तैयार किया है। यह कदम सैन्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या अमेरिका ने अब तकनीक को कॉपी करने की उस रणनीति को अपना लिया है, जिसके लिए अक्सर चीन को निशाने पर लिया जाता है।
लुकास (Low-cost Uncrewed Combat Attack System) एक वन-वे यानी आत्मघाती ड्रोन है। इसकी कीमत मात्र 35,000 डॉलर के आसपास है। अमेरिका ने लंबे समय तक महंगे एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट मिसाइल) पर भरोसा किया, लेकिन ईरान के सस्ते शाहेद ड्रोन्स ने इस रणनीति को फेल कर दिया। जब 30-50 हजार डॉलर के ड्रोन को गिराने के लिए 3 मिलियन डॉलर की मिसाइल खर्च करनी पड़ती है, तो आर्थिक असंतुलन पैदा हो जाता है। इसी से बचने के लिए अमेरिका ने अब सस्ते के बदले सस्ता वाला रास्ता अपनाया है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, लुकास ड्रोन को विकसित करने में ईरानी तकनीक का अध्ययन किया गया है। अमेरिकी इंजीनियरों ने युद्ध के मैदान में जब्त किए गए शाहेद ड्रोन के डिजाइन को बारीकी से समझा और उसकी रिवर्स इंजीनियरिंग की। हालांकि, अमेरिका ने इसे और अधिक आधुनिक और ओपन-आर्किटेक्चर के साथ तैयार किया है, ताकि इसे जरूरत के हिसाब से बदला जा सके। पहली बार इसका सफल परीक्षण अरब की खाड़ी में यूएसएस सांता बारबरा से किया गया।
ईरान ने तीखा आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल उनके ही डिजाइन का इस्तेमाल करके अरब देशों में फाल्स फ्लैग (झूठे हमले) कर रहे हैं ताकि तनाव बढ़ाया जा सके। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि लुकास का इस्तेमाल ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि ईरान का शाहेद भी पूरी तरह मौलिक नहीं है। जानकारों का मानना है कि शाहेद की डिजाइन 1990 के दशक के इजरायली हार्पी ड्रोन से प्रेरित है। इसके अलावा, 2011 में जब ईरान ने अमेरिका का अत्याधुनिक RQ-170 सेंटिनल स्टेल्थ ड्रोन अपने कब्जे में लिया था, तब से ईरान ने अमेरिकी तकनीक की नकल करके अपने ड्रोन बेड़े को आधुनिक बनाया है।
अमेरिका अब अपनी पारंपरिक मिसाइल नीति को छोड़कर व्यापक पैमाने पर ड्रोन उत्पादन पर जोर दे रहा है। ड्रोन डोमिनेंस प्रोग्राम के तहत पेंटागन का लक्ष्य 2027 तक 3 लाख से ज्यादा हथियारबंद ड्रोन तैयार करना है। इसके लिए 1 अरब डॉलर का बजट भी तय किया गया है।
अब जंग का मैदान बदल रहा है। जहाँ पहले महंगी मिसाइलें दबदबा रखती थीं, वहीं अब भविष्य की लड़ाइयाँ सस्ते और बड़ी संख्या में मौजूद ड्रोन्स से लड़ी जा रही हैं। अमेरिका का लुकास ड्रोन इस बात का सबूत है कि सुपरपावर ने भी अब सस्ते और सटीक वार के महत्व को स्वीकार कर लिया है।
BREAKING: U.S. Navy deploys HELIOS laser weapon in combat for first time—shoots down Iranian drones off coast. CENTCOM footage out.
— The Little Satoshi News (@TheRiser100x) March 10, 2026
HELIOS: ship-mounted high-energy laser system intercepts drones, fast-attack craft, missiles with precision at speed of light.
$20K Shahed vs… pic.twitter.com/a0RRNrv78H
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