इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वॉशिंगटन अब भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए भीख मांग रहा है।
अराघची का अमेरिका पर बड़ा आरोप अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने महीनों तक भारत जैसे देशों पर दबाव डाला और उन्हें रूसी तेल आयात बंद करने के लिए धमकाया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ दो हफ्ते के संघर्ष के बाद व्हाइट हाउस का रुख पूरी तरह बदल गया है। अब अमेरिका खुद देशों से रूसी तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है।
अस्थायी राहत की घोषणा ईरानी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने रूसी तेल पर लगे प्रतिबंध को अस्थायी रूप से हटाने की घोषणा की। अमेरिका ने 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की मंजूरी दी है, लेकिन यह छूट केवल उस तेल के लिए है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है।
क्या अमेरिका की मजबूरी है? अमेरिकी वित्त विभाग का तर्क है कि यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए लिया गया है। अमेरिका का कहना है कि इसका उद्देश्य तेल आपूर्ति को सुचारू करना है और इससे रूस को कोई बड़ा रणनीतिक लाभ नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले से ही परिवहन के दौरान रास्ते में है।
युद्ध के बीच रूस की बंपर कमाई ईरान-इजरायल विवाद ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के कारण पूरी दुनिया में तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट की वजह से रूस को हर दिन लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1389 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त मुनाफा हो रहा है।
रणनीति का उलटा असर अराघची ने यूरोप पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन करने से उन्हें रूस के विरुद्ध अमेरिका का संरक्षण मिल जाएगा। ईरानी विदेश मंत्री ने इसे दयनीय स्थिति करार देते हुए कहा कि अमेरिका की यह कूटनीति अब खुद उनके लिए ही चुनौती बन गई है।
The U.S. spent months on bullying India into ending oil imports from Russia. After two weeks of war with Iran, White House is now begging the world—incl India—to buy Russian crude.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) March 13, 2026
Europe thought backing illegal war on Iran would win U.S. support against Russia.
Pathetic. pic.twitter.com/fbkrXpXa9P
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