मौत से पहले बंकर में क्यों नहीं गए खामेनेई? प्रतिनिधि ने खोला राज
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28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। तेहरान स्थित उनके आधिकारिक परिसर पर बंकर-बस्टर बमों से किए गए इस हमले ने ईरान की पूरी सैन्य लीडरशिप को हिलाकर रख दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि 86 वर्षीय खामेनेई ने उस वक्त सुरक्षित स्थान पर जाने से इनकार क्यों किया?

9 करोड़ लोगों के लिए बंकर नहीं, तो मेरे लिए भी नहीं भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि तनाव बढ़ने के बावजूद खामेनेई ने अपने घर से बाहर निकलने या बंकर में शरण लेने से साफ इनकार कर दिया था। उनका तर्क था कि जब तक ईरान के 9 करोड़ नागरिकों के लिए सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध नहीं हैं, तब तक वे खुद के लिए कोई विशेष सुरक्षा नहीं लेंगे।

सुरक्षा का विशेष इंतजाम भी नकारा इलाही के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों ने जब उनसे आग्रह किया कि कम से कम घर के बेसमेंट में एक बंकर बनवा लिया जाए, तब भी खामेनेई नहीं माने। उन्होंने कहा था, अगर आप 9 करोड़ ईरानियों के लिए 9 करोड़ बंकर बना सकते हैं, तभी मैं अपने लिए बंकर बनवाऊंगा। उनका मानना था कि एक नेता को अपने देश के गरीबों और वंचितों के समान ही जीवन जीना चाहिए।

अस्पताल की मौत नहीं, शहादत चाहते थे इलाही ने बताया कि 86 वर्षीय खामेनेई ने पहले ही कह दिया था कि उन्हें अस्पताल के बिस्तर या किसी बीमारी से मरना मंजूर नहीं है। वे लंबे समय से शहादत की इच्छा रखते थे। उनकी मौत रमजान के पवित्र महीने में हुई, जिसे उनके समर्थकों ने अल्लाह द्वारा दिया गया सबसे बड़ा सम्मान माना है। इलाही का दावा है कि उनकी शहादत ने शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच एक नई एकता को जन्म दिया है।

युद्ध का प्रभाव और ईरान का रुख पिछले 15 दिनों से जारी इस भीषण युद्ध में अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हाल ही में अमेरिका ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल टर्मिनल खार्ग आईलैंड को निशाना बनाया, जहां से ईरान अपना 90% तेल निर्यात करता है। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और मिडिल ईस्ट स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

ईरानी प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत के बजाय अपनी गरिमा के लिए युद्ध जारी रखने को तैयार है। उन्होंने कहा, यह युद्ध हम पर थोपा गया है। हम अपनी आजादी के लिए अंतिम सांस तक लड़ने को तैयार हैं।

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