गुजरात BJP के लिए चुनौती: आदिवासी विधायक वसावा की बढ़ती लोकप्रियता
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अहमदाबाद: 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने गुजरात में रिकॉर्ड जीत दर्ज की, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) के एक विधायक सत्तारूढ़ दल के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। डेडियापाड़ा से आप विधायक चैतर वसावा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

वडोदरा की सेंट्रल जेल से रिहा होने के बाद वसावा की रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही है। दाहोद और छोटा उदेपुर जिलों में उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

हाईकोर्ट ने वसावा को जमानत देते समय उनके विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद वह गुजरात की आदिवासी बेल्ट में गुजरात जोड़ो अभियान चला रहे हैं।

वसावा ने दावा किया है कि छोटा उदेपुर में उनके अभियान को लोगों का अपार समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा यह जनसैलाब बता रहा है कि गुजरात में बीजेपी का अंत निश्चित है। हजारों लोग बीजेपी की तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं।

वसावा न केवल आदिवासी इलाकों में आप के सदस्यता अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, बल्कि विधानसभा में विधायक दल के नेता के रूप में सरकार पर भी हमला बोल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल अतिवृष्टि के मुआवजे के रूप में 319 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी, और बाद में 1415 करोड़ रुपये देने को कहा था। लेकिन नुकसान के फार्म भरने वाले सभी किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है। 1734 करोड़ रुपये की घोषणा के बाद भी 500 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।

तीन साल पहले डेडियापाड़ा से विधायक बनने के बाद वसावा का प्रभाव नर्मदा जिले तक ही सीमित था। अब वह पूरे आदिवासी क्षेत्र में एक मजबूत नेता के रूप में उभरे हैं। 37 वर्षीय वसावा 34 साल की उम्र में विधायक बने थे। उनकी दो पत्नियां हैं, जो उनका समर्थन कर रही हैं।

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