ट्रंप के टैरिफ से मुक्ति दिलाने निकले मोदी, चीन हुआ खुश: ड्रैगन और हाथी लाएंगे समृद्धि
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी चीन यात्रा को लेकर चीन उत्साहित है और इसे भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत मान रहा है। मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत, अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

पीएम मोदी शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को जापान पहुंच चुके हैं, जहां वे प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मिलेंगे। इसके बाद वे SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने तिआनजिन, चीन जाएंगे, जहां उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता की संभावना है। SCO सम्मेलन में ही मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी मुलाकात होगी।

चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक संपादकीय में इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया है। इसमें कहा गया है कि यह यात्रा भारत और चीन के राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर हो रही है और यह दोनों देशों के बीच रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने का काम करेगी।

ग्लोबल टाइम्स ने हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक घटनाओं का उल्लेख किया है, जैसे सीमा पर सैनिकों द्वारा मिठाइयों का आदान-प्रदान, भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत की यात्रा का पुन: आरम्भ और भारत-चीन के बीच सीधी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने की संभावना।

अख़बार ने यह भी लिखा है कि गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों को यह एहसास हुआ है कि सीमा विवादों से ज्यादा महत्वपूर्ण आर्थिक विकास और रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं। कमज़ोर वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच दोनों देशों को विकास के लिए स्थिरता की आवश्यकता है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 1.7% बढ़कर 138.478 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

संपादकीय में कहा गया है कि अमेरिका अब अपने सहयोगियों को समर्थन देने के बजाय लेन-देन की राजनीति अपना रहा है, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में भी खटास आई है।

ग्लोबल टाइम्स ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण का हवाला देते हुए कहा कि भारत अपने किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। भारत अब व्यापार में विविधता लाने के लिए लगभग 40 देशों के साथ काम कर रहा है।

अख़बार ने पश्चिमी मीडिया संस्थानों की इस धारणा को खारिज किया है कि भारत और चीन अमेरिका-विरोधी गठबंधन बना रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि दोनों देशों की विदेश नीतियां स्वतंत्र हैं और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।

संपादकीय में सीएनएन की एक टिप्पणी का उल्लेख किया गया है जिसमें कहा गया है कि भारत-चीन संबंधों में बदलाव भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता की नीति का एक उदाहरण है, जो किसी भी गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देती है।

ग्लोबल टाइम्स ने याद दिलाया कि भारत उन पहले देशों में से एक था जिन्होंने पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता दी थी और दोनों देशों ने 1950 के दशक में पंचशील सिद्धांत का प्रस्ताव दिया था, जो आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार है।

अख़बार ने निष्कर्ष निकाला कि मोदी की चीन यात्रा भारत-चीन संबंधों को सुधारने का एक शानदार अवसर है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब दोनों देश अपने रिश्तों को विरोधी नहीं बल्कि भागीदार की तरह देखने की कोशिश कर रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने उम्मीद जताई कि भारत और चीन कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्षों को मनाते हुए एक नया अध्याय लिखेंगे, जहां ड्रैगन और हाथी दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाने में योगदान देंगे।

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