अलीगढ़: इंसाफ की गुहार लगाती बुजुर्ग महिला को CO ने झिड़का, वायरल वीडियो ने खोली पुलिस की पोल
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अलीगढ़ जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। CO सिविल लाइन अभय पांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक बुजुर्ग महिला सड़क पर CO के पैरों में गिरकर रोते हुए न्याय की गुहार लगा रही है।

अफसोस की बात यह है कि अधिकारी ने महिला की भावनाओं की कद्र न करते हुए उसे फटकार लगा दी।

यह घटना तब सामने आई जब गोकुलपुर गांव निवासी राजकुमार, जो कि पेशे से दूध विक्रेता है, एक गाय को सड़क पर भटकते देख अपने घर ले आया। कुछ समय बाद गाय के मालिक ने थाना सिविल लाइन में तहरीर दी।

पुलिस ने बिना गहराई से जांच किए राजकुमार और उसके बेटे को गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया।

राजकुमार की पत्नी, जो खुद एक वृद्ध महिला हैं, न्याय के लिए CO सिविल लाइन अभय पांडे के पास पहुंचीं। आरोप है कि उन्होंने न केवल महिला की बात अनसुनी कर दी, बल्कि अपमानजनक ढंग से जवाब भी दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, राजकुमार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उन्होंने केवल गाय को सुरक्षित रखने के लिए अपने घर ले गए थे। इसके बावजूद उन्हें गाय चोरी के मामले में जेल भेज दिया गया, जिससे गांव में गुस्सा फैल गया।

राजकुमार और उनके बेटे को जेल भेजे जाने के बाद, गोकुलपुर गांव के सैकड़ों लोग SSP कार्यालय पर पहुंच गए और प्रदर्शन किया।

लोगों का कहना है कि CO सिविल लाइन अभय पांडे ने सत्ता और वर्दी का गलत इस्तेमाल किया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और CO के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

सिविल लाइन थाने के अधिकारियों का कहना है कि FIR गाय मालिक की तहरीर पर दर्ज की गई है और CO सिविल लाइन अभय पांडे ने नियमानुसार कार्रवाई की है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या उन्होंने पीड़ित की बात को गंभीरता से लिया था।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पुलिस मानवाधिकारों का पालन कर रही है? एक वृद्ध महिला, जो खुद को असहाय महसूस कर रही थी, CO के सामने रोती रही, लेकिन उसे न्याय के स्थान पर अपमान मिला।

पुलिस का दायित्व है कि वह हर व्यक्ति की बात को समान रूप से सुने और निष्पक्ष रूप से जांच करे। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ, और इसका प्रमाण है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ट्विटर और फेसबुक पर हैशटैग #JusticeForRajkumar और CO के नाम का हैशटैग ट्रेंड करने लगा। कुछ यूज़र्स ने इसे पुलिस की तानाशाही बताया तो कुछ ने सीधे तौर पर CO को बर्खास्त करने की मांग की।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में उचित कदम उठाएगा? क्या CO के खिलाफ विभागीय जांच शुरू होगी या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

SSP अलीगढ़ से जब इस मामले पर प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने जांच की बात कही, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

इस पूरे मामले ने न केवल CO की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं।

जब जनता ही पुलिस से न्याय की मांग करते हुए अपमानित हो, तो ऐसे में कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है।

जरूरत है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता से जांच हो और दोषियों को सजा मिले, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों। CO पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषमुक्त या दोषसिद्ध साबित करने का काम अब प्रशासन के ऊपर है।

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