भारतीय वायु सेना ने पूर्वी लद्दाख के मुध-न्योमा एयरबेस पर अपने IL-76MD भारी-लिफ्ट परिवहन विमान को उतारकर विमानन इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। समुद्र तल से 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह लैंडिंग, दुनिया भर में इस विमान द्वारा की गई अब तक की सबसे अधिक ऊंचाई वाली लैंडिंग है।
रणनीतिक रूप से क्यों है यह एयरबेस अहम? न्योमा एयरबेस वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह डेमचोक और पैंगोंग त्सो जैसे संवेदनशील इलाकों के अत्यंत करीब है। लेह और थोइस जैसे एयरफील्ड बॉर्डर से अधिक दूर हैं, जिससे आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने में समय लगता है। न्योमा की सक्रियता से सैनिकों की तैनाती और रसद की आवाजाही अब रिकॉर्ड समय में संभव होगी।
दौलत बेग ओल्डी और फुकचे से आगे की उड़ान हालांकि भारत के पास दौलत बेग ओल्डी (16,614 फीट) और फुकचे जैसे एयरस्ट्रिप पहले से मौजूद हैं, लेकिन न्योमा की खासियत यह है कि यहाँ 3 किलोमीटर लंबा रनवे है। यह रनवे न केवल परिवहन विमानों, बल्कि लड़ाकू विमानों के संचालन के लिए भी पूरी तरह तैयार है। दौलत बेग ओल्डी जैसे ऊंचे स्थानों पर अभी भारी-भरकम IL-76 जैसे विमानों को उतारना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है।
कौन है गजराज ? सोवियत मूल का इल्यूशिन IL-76 विमान, जिसे भारतीय वायु सेना में गजराज नाम दिया गया है, 1985 से बेड़े का हिस्सा है। चार इंजन वाला यह विशालकाय विमान T-72 टैंकों, BMP इन्फैंट्री कॉम्बैट वाहनों और भारी सैन्य साजो-सामान को कठिन से कठिन इलाकों में पहुंचाने में माहिर है। गलवान संकट के दौरान भी इन विमानों ने ही सैनिकों और भारी हथियारों की तेजी से तैनाती सुनिश्चित की थी।
इतिहास से वर्तमान तक का सफर न्योमा एयरस्ट्रिप 1962 के युद्ध के बाद दशकों तक निष्क्रिय रही थी। सितंबर 2009 में इसे फिर से सक्रिय किया गया, जब एक AN-32 विमान यहाँ उतरा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सितंबर 2023 में इस अत्याधुनिक एयरबेस की आधारशिला रखी थी। आज यह बेस आधुनिक सुविधाओं से लैस है, जो चीन के बढ़ते दबाव के बीच भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई ऊंचाई पर ले गया है।
चीन को कड़ा जवाब चीन ने तिब्बती पठार पर डमशुंग, तिंगरी और बुरांग जैसे एयरबेस का एक नेटवर्क तैयार किया है, जहां उसने लंबी रनवे और मजबूत एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। न्योमा का पूरी तरह से चालू होना चीन के इस नेटवर्क के जवाब में भारत की एक बड़ी रणनीतिक जीत है। यह अब केवल एक एयरस्ट्रिप नहीं, बल्कि लद्दाख सीमा पर भारत का एक अभेद्य रक्षा केंद्र बन चुका है।
*13,629 FEET. A NEW HEIGHT IN AVIATION HISTORY.
— Indian Air Force (@IAF_MCC) November 7, 2026
An Indian Air Force IL-76MD has scripted history with a successful landing at Nyoma, marking the highest-altitude landing ever achieved by the aircraft anywhere in the world.
A remarkable demonstration of the aircraft’s enduring… pic.twitter.com/OQeep4Iv3y
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