तिरंगे के लिए लड़ने वाला योद्धा यूं कैसे हार गया? मोहम्मद शमी की विदाई पर क्या टूटा, क्या बचा?
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नई दिल्ली: 6 नवंबर 2013 को मोहम्मद शमी ने जिस दिन अपने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट करियर का आगाज किया था, उसी तारीख को उन्होंने 2026 में अपने इस सफर को अलविदा कह दिया। एक ऐसा गेंदबाज जिसने मैदान पर अपनी स्विंग और तेजी से बल्लेबाजों की कमर तोड़ी, आज वह बिना मैदान पर अपना आखिरी टेस्ट खेले विदा ले रहा है। यह न सिर्फ शमी का रिटायरमेंट है, बल्कि उस जुझारू दौर का अंत है जिसमें देश सर्वोपरि था।

मैं मुस्लिम हूं, भारतीय होना सबसे बड़ा गर्व

शमी सिर्फ एक तेज गेंदबाज नहीं थे, बल्कि वह एक व्यक्तित्व थे। जब कट्टरपंथियों ने उनकी पत्नी को लेकर उन पर निशाना साधा, तब भी वे अविचलित रहे। शमी ने स्पष्ट कहा था, मैं मुस्लिम हूं और मुझे इस पर गर्व है। मैं भारतीय हूं और मुझे इस पर भी गर्व है। मेरे लिए देश सबसे पहले है। उनकी यह बेबाकी ही उनकी पहचान थी, जो उन्हें आम क्रिकेटरों की भीड़ से अलग खड़ा करती थी।

मैदान में चट्टान, निजी जीवन में सादगी

शमी को टूटने वाला खिलाड़ी नहीं कहा जा सकता। 2023 विश्व कप इसका सबसे बड़ा गवाह है, जहां मौका मिलने पर उन्होंने 7 मैचों में 24 विकेट लेकर कोहराम मचा दिया था। वह एक ऐसे योद्धा थे जो बिना किसी ग्लैमराइज्ड छवि के जमीन से जुड़े रहे। उनका प्रैक्टिस नेट खेतों के बीच लगा होना और बेटी के लिए उनकी भावुकता यह दर्शाती है कि स्टारडम के बावजूद उनके पैर हमेशा जमीन पर रहे।

चयनकर्ताओं पर रवि शास्त्री का बड़ा सवाल

शमी की विदाई पर पूर्व कोच रवि शास्त्री ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। शास्त्री ने खुले तौर पर कहा कि बंगाल के लिए लगातार फर्स्ट क्लास क्रिकेट में गेंदबाजी कर रहे शमी को टेस्ट टीम में नजरअंदाज करना समझ से परे है। फिटनेस के दावों को खारिज करते हुए शास्त्री ने कहा कि घरेलू मैचों में लंबे स्पेल डालना ही उनकी पूर्ण फिटनेस का सबसे बड़ा प्रमाण था, जिसे चयनकर्ताओं ने पूरी तरह नजरअंदाज किया।

एक मलाल, जो अंत तक रहा

शमी का करियर शानदार रहा—64 टेस्ट मैचों में 229 विकेट किसी भी गेंदबाज के लिए गौरव की बात है। लेकिन उन्हें इस बात का मलाल जरूर रहा होगा कि वे उन भारतीय टीमों का हिस्सा नहीं बन सके जिन्होंने टी20 विश्व कप जीता। 2024 में रोहित शर्मा की कप्तानी में और 2026 में सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम इंडिया ने तिरंगे का मान बढ़ाया, पर एक योद्धा जो फॉर्म में था, उसे अंतिम पलों में किनारा कर दिया गया।

शमी का आखिरी संदेश: सफेद जर्सी, सुनहरी यादें

संन्यास लेते हुए शमी ने अपने भावुक संदेश में लिखा, सफेद जर्सी से विदा ले रहा हूं, लेकिन उससे जुड़ी यादों से नहीं। हर विकेट, हर चोट और हर वापसी ने मुझे सिखाया। मैदान पर मेरी आखिरी टेस्ट बॉल भले ही फेंकी जा चुकी हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का गर्व हमेशा मेरे दिल में जिंदा रहेगा।

मोहम्मद शमी का जाना यह बताता है कि भारतीय क्रिकेट में अब शायद उस जुनून और मिट्टी से जुड़े तेज गेंदबाजों के दौर को किसी और नजरिए से देखा जाने लगा है। शमी गए, लेकिन उनकी वह स्विंग और तिरंगे के प्रति उनका समर्पण हमेशा भारतीय क्रिकेट की फाइलों में दर्ज रहेगा।

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