दीवाली के करीब आते ही दिल्ली की हवा न केवल खराब हो गई है, बल्कि शहर की सड़कें बड़े प्रदूषण हॉटस्पॉट में तब्दील हो गई हैं। त्योहारों की खरीददारी के लिए बाजारों में उमड़ी भीड़ और सीमाओं पर सख्त जांच के चलते लगा भीषण जाम, प्रदूषण कम करने के सरकारी प्रयासों की हवा निकाल रहा है।
सीमाओं पर गाड़ियों का जहर वाला काफिला गुरुग्राम का सरहौल बॉर्डर हो या गाजीपुर बॉर्डर, हर तरफ वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। बीएस-6 मानकों से नीचे के वाहनों की जांच के लिए बनाई गई व्यवस्था अब जाम का सबब बन गई है। जाम में घंटों इंजन चालू रहने से ईंधन की खपत तो बढ़ ही रही है, साथ ही हवा में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का जहर भी घुल रहा है।
10 मिनट का जाम है कितना खतरनाक? आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एक निष्क्रिय (आइडल) खड़ी पेट्रोल कार प्रति मिनट लगभग 30.7 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है। यदि सरहौल बॉर्डर पर 400 कारें 10 मिनट तक जाम में फंसी रहें, तो वातावरण में 123 किलो कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। वहीं, 20 मिनट के जाम में यह आंकड़ा 245 किलो तक पहुंच जाता है।
परिवहन: प्रदूषण का सबसे बड़ा कारक टेरी (TERI) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पीएम 2.5 उत्सर्जन में वाहनों की हिस्सेदारी 47 फीसदी और नाइट्रोजन ऑक्साइड में 78 फीसदी तक है। सर्दियों में शहर की हवा को जहरीला बनाने में परिवहन क्षेत्र का योगदान 15 से 20 प्रतिशत तक आंका गया है। जाम के दौरान गाड़ियों के इंजन का लगातार चालू रहना इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
विशेषज्ञों की सलाह: जांच हो, पर जाम न हो सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी का मानना है कि प्रदूषणकारी वाहनों पर लगाम जरूरी है, लेकिन जांच का तरीका स्मार्ट होना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि सीमाओं पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम, पर्याप्त जांच लेन और अलग होल्डिंग एरिया बनाए जाने चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण की सफलता केवल चालान काटने से नहीं, बल्कि जाम मुक्त यातायात सुनिश्चित करने से मापी जानी चाहिए।
क्या है ईंधन और उत्सर्जन का गणित? एक सामान्य पेट्रोल कार 10 मिनट इंजन चालू रखने पर लगभग 133 मिलीलीटर पेट्रोल जलाती है और 307 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है। वहीं, डीजल कार 10 मिनट में 268 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करती है। दिल्ली के 11 चौराहों पर हुए अध्ययन के अनुसार, जाम के दौरान होने वाली यह ईंधन की बर्बादी सीधे तौर पर फेफड़ों पर बोझ बढ़ा रही है।
#WATCH | Delhi: Traffic snarl near Ghazipur Highway amid the festive rush. Visuals shot around 4 pm today. pic.twitter.com/ESpfdzHSVT
— ANI (@ANI) November 6, 2026
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