रांची में आदिवासी नेत्री निशा भगत की आत्महत्या की खबर ने झारखंड की राजनीति और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सरना-सनातन धर्म के मुद्दों को मुखरता से उठाने वाली निशा के इस कदम ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन थीं निशा भगत? निशा भगत एक संघर्षशील और बेबाक आदिवासी नेत्री के रूप में जानी जाती थीं। उन्होंने 2024 का विधानसभा चुनाव गुमला सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर लड़ा था। हालांकि, चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन उनकी पहचान एक जुझारू नेत्री की रही है।
राजनीतिक सफर और निष्कासन निशा का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। कुर्मी आंदोलन के दौरान एक विवादित बयान देने के कारण उन्हें जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो ने अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी से बाहर होने के बावजूद उनकी मौत पर राजनीति के गलियारों में सन्नाटा पसरा है और हर कोई स्तब्ध है।
जयराम महतो ने की निष्पक्ष जांच की मांग विधायक जयराम महतो ने निशा की मौत पर गहरा दुख जताते हुए सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा, आखिर ऐसा क्या हुआ कि आदिवासी समाज की एक लड़ाकू बेटी जिंदगी की जंग हार गई? किसने उन्हें इतना मजबूर किया कि उन्हें आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ा?
क्या है सच्चाई? निशा की मौत ने अब एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। क्या उनके पीछे कोई राजनीतिक दबाव था या फिर कोई व्यक्तिगत कारण? फिलहाल, पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। आदिवासी समाज में भी इस घटना के बाद भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच में मौत के असली कारणों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता चल पाएगा। निशा की मौत ने समाज के सामने कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं, जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है।
*आज मन बेहद व्यथित और भारी है. झारखंड की संघर्षशील और प्रखर आदिवासी नेत्री निशा भगत जी के असमय निधन की खबर बेहद दुखद और हृदयविदारक है. आखिर ऐसा क्या हुआ कि आदिवासी समाज की बेबाक और लड़ाकू बेटी जिंदगी की जंग हार गई ? किसने उन्हें इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें आत्महत्या जैसा कदम… pic.twitter.com/TToTVIUOU1
— Jairam Kumar Mahato MLA (@Tigerjairam) November 6, 2026
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