दिवाली के ठीक पहले सोशल मीडिया पर दो अलग दुनिया दिख रही हैं। एक तरफ दिल्ली की एक कंपनी ने कर्मचारियों की मेज पर iPhone 16 सजा दिए, तो दूसरी तरफ हरियाणा की एक फार्मा कंपनी ने कर्मचारियों को नई Kia Sonet SUV की चाबियां थमा दीं।
इसके उलट, लाखों ऐसे कर्मचारी हैं जिनके हाथ में सिर्फ एक मिठाई का डिब्बा या सूखे मेवे का छोटा पैकेट आया, या फिर कुछ भी नहीं। आखिर यह फासला क्यों है? क्या ये कंपनियां वाकई कंजूस हैं या गिफ्ट के पीछे कोई गहरा गणित काम करता है?
इस साल कॉर्पोरेट गिफ्टिंग की कड़वी सच्चाई यह है कि महंगाई ने कंपनियों के हाथ बांध दिए हैं। कच्चे माल और पैकेजिंग की लागत में 15% तक की वृद्धि हुई है, जबकि कंपनियों ने अपने दिवाली बजट में 8-10% की कटौती की है।
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, एक औसत भारतीय कंपनी का प्रति-कर्मचारी गिफ्ट बजट 700 से 1,500 रुपए के बीच है। कंपनियां अब बल्क ऑर्डर में वजन कम और आइटम ज्यादा वाले बॉक्स चुन रही हैं, ताकि कम बजट में भी तोहफा बड़ा और प्रभावशाली दिखे।
कंपनियां कैश बोनस देने के बजाय सामान देना पसंद करती हैं, क्योंकि इसके पीछे टैक्स के कड़े नियम हैं:
गिफ्ट को अनिवार्य बोनस (Statutory Bonus) से न जोड़ें। कानून के तहत 21,000 रुपए मासिक वेतन से कम पाने वाले फैक्ट्री कर्मचारियों को 8.33% बोनस देना अनिवार्य है।
वहीं, कॉर्पोरेट या IT सेक्टर के कर्मचारी इस अनिवार्य दायरे से बाहर होते हैं। इसलिए, जब एक फैक्ट्री कर्मचारी को कानूनी मजबूरी में बोनस मिलता है, तो वह एक IT कर्मचारी के लिए लग्जरी तोहफे (जैसे iPhone) के सामने छोटा नजर आता है। दोनों ही अपनी-अपनी सैलरी स्ट्रक्चर की कानूनी श्रेणियों में बंधे हैं।
कंपनियां पहले गिफ्ट नहीं चुनतीं, पहले बजट तय होता है। मुंबई की एक उदाहरण कंपनी का हिसाब देखें तो- मान लीजिए फाइनेंस से 1.5 लाख रुपए मंजूर हुए। इसमें से 5% बफर, शिपिंग, पैकिंग और लेबर कॉस्ट निकालते ही करीब 20-30 हजार रुपए तो सीधे खर्च हो जाते हैं।
बचे हुए बजट को जब कर्मचारियों की संख्या से भाग दिया जाता है, तो असल कीमत सामने आती है। इसीलिए 1,250 प्रति व्यक्ति का दावा असल में 1,000 रुपए या उससे कम के गिफ्ट पर सिमट जाता है।
आज के दौर में कॉर्पोरेट गिफ्टिंग त्योहारी रस्म नहीं, बल्कि रिटेंशन टूल है। कंपनियां जानती हैं कि एक ब्रांडेड एयर फ्रायर या गैजेट कर्मचारी को लंबे समय तक याद रहता है और कंपनी की सोशल मीडिया इमेज भी बनाता है।
कैश बोनस में भावनात्मक जुड़ाव कम होता है और वह टैक्स के बोझ के साथ आता है। इसीलिए कंपनियां अब मिठाई के डिब्बों से आगे बढ़कर ऐसी चीजों पर निवेश कर रही हैं जो कर्मचारी की रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग हो सकें। अंततः, यह गिफ्ट नहीं, बल्कि कर्मचारी को कंपनी से जोड़े रखने की एक सोची-समझी रणनीति है।
🚨 A Delhi-based company has surprised its employees with iPhone 16 smartphones as Diwali gifts. pic.twitter.com/pZaO0XQ903
— Indian Tech & Infra (@IndianTechGuide) November 4, 2026
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