शुभमन गिल और पीवी सिंधु की कनपटी पर चिपका यह Temple आखिर है क्या? क्या वाकई यह दिमाग पढ़ सकता है?
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हाल ही में क्रिकेटर शुभमन गिल और बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु को अपनी कनपटी पर एक छोटा सा सिल्वर डिवाइस चिपकाए देखा गया। यह कोई टैटू या एक्सेसरी नहीं, बल्कि फूड-टेक कंपनी के सीईओ दीपिंदर गोयल का नया स्टार्टअप Temple है। चर्चा इतनी तेज है कि डिवाइस की बुकिंग शुरू होते ही वेबसाइट क्रैश होने के दावे किए जा रहे हैं।

आखिर यह Temple डिवाइस है क्या?

गोयल के अनुसार, Temple एक एडवांस्ड वेलनेस और फिटनेस ट्रैकर है। इसे स्मार्टवॉच या स्मार्ट रिंग का अगला पड़ाव माना जा सकता है। यह कनपटी (Temple) पर चिपकता है और दिमाग के पास रक्त प्रवाह (Blood Flow) की लगातार निगरानी करता है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस ग्रेविटी एजिंग हाइपोथेसिस (GAH) पर आधारित है, जिसका लक्ष्य शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना है।

कनपटी ही क्यों?

इस डिवाइस को हाथ के बजाय कनपटी पर लगाने के पीछे एक ठोस तर्क दिया गया है। दीपिंदर गोयल बताते हैं कि कनपटी एक मुख्य धमनी के ठीक ऊपर होती है। यह शरीर का इकलौता हिस्सा है जहां भारी शारीरिक गतिविधि के दौरान भी रक्त प्रवाह स्थिर रहता है। यही कारण है कि यह एथलीट्स के प्रदर्शन को सटीक रूप से मापने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

क्या यह कोई मेडिकल डिवाइस है?

शुरुआत में इसे ब्रेन-हेल्थ डिवाइस के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन अब कंपनी ने इसे स्पष्ट रूप से फिटनेस और वेलनेस श्रेणी में रखा है। इसमें एप्पल वॉच जैसी ही फोटप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) ऑप्टिकल सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। लेकिन, इसे अभी तक किसी मेडिकल संस्थान से प्रमाणित नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों और डॉक्टरों की चिंताएं

जहाँ पीवी सिंधु जैसे एथलीट्स इसे गेम-चेंजर बता रहे हैं, वहीं मेडिकल जगत में इसे लेकर काफी विरोध है। TheLiverDoc और कई अन्य डॉक्टरों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐप्पल या फिटबिट जैसे डिवाइस एफडीए (FDA) से मंजूर होने के लिए सालों के क्लिनिकल ट्रायल्स से गुजरते हैं, जबकि Temple बिना किसी सार्वजनिक वैज्ञानिक प्रमाण के बाजार में उतारा गया है।

गोयल का जवाब: अगर घोटाला होता, तो कब का बंद हो जाता

आलोचनाओं के बीच दीपिंदर गोयल ने एक लंबा जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस प्रोजेक्ट में 30 मिलियन डॉलर का निवेश कर चुके हैं। उन्होंने 14 दिन की नो-क्वेश्चन-आस्क्ड रिटर्न पॉलिसी का बचाव करते हुए कहा कि अगर डिवाइस काम नहीं करेगा, तो ग्राहक खुद ही उसे लौटा देंगे। वे इसे एक बिजनेस के नजरिए से देख रहे हैं, जहां उत्पाद की गुणवत्ता ही उसका सबसे बड़ा सबूत होगी।

अभी यह डिवाइस सीमित यूजर्स के पास है। आने वाले समय में जब आम लोग इसका इस्तेमाल करेंगे, तभी यह स्पष्ट हो पाएगा कि Temple वाकई स्वास्थ्य की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला गैजेट है या सिर्फ एक महंगा फिजूल का शौक।

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