नागपुर: सरकारी दफ्तरों में आम लोगों की बेबसी और अधिकारियों के वीआईपी कल्चर की चर्चा अक्सर होती रहती है। लेकिन महाराष्ट्र के नागपुर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है।PWD दफ्तर में एक IAS अधिकारी और एक स्थानीय युवक के बीच हुई तीखी बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है पूरा मामला? घटना नागपुर के पीडब्ल्यूडी (PWD) कार्यालय की है। बताया जा रहा है कि उस समय विभाग में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक चल रही थी। इसी बीच, यश गोरखेड़े नाम का एक स्थानीय युवक अपनी समस्या लेकर अधिकारी के पास पहुंचा। जैसे ही युवक ने अपनी बात रखनी चाही, अधिकारी ने उससे अपॉइंटमेंट के बारे में पूछ लिया और उसे बाद में आने की नसीहत दी।
तुम नौकर हो : युवक का जोरदार प्रहार अधिकारी का यह रवैया युवक को नागवार गुजरा। उसने तुरंत अधिकारी को टोकते हुए कहा, You are a public servant. तुम नौकर हो, तुम नौकर हो। युवक ने तर्क दिया कि अधिकारी जनता की सेवा के लिए नियुक्त किए गए हैं, न कि उन पर एहसान करने के लिए।
उसने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिकारियों की सैलरी और सरकारी दफ्तरों का पूरा खर्च जनता के टैक्स के पैसे से चलता है, इसलिए उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह होना ही चाहिए।
कौन है यश गोरखेड़े? वीडियो में दिख रहे इस युवक की पहचान यश गोरखेड़े के रूप में हुई है, जो जन बदलाव पार्टी का संस्थापक बताया जा रहा है। यश स्थानीय स्तर पर जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जिस तरह से प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बीच सरेआम अधिकारी से सवाल किया, वह कई लोगों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है।
सोशल मीडिया पर बंटे लोग वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट दो गुटों में बंट गया है। एक वर्ग का मानना है कि सरकारी अधिकारियों को अपनी कुर्सी का अहंकार छोड़कर आम आदमी की बात सुननी चाहिए और जनता का काम करना ही उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
वहीं, दूसरे पक्ष का तर्क है कि सरकारी कामकाज में सुव्यवस्था के लिए मीटिंग्स और प्रोटोकॉल का पालन करना भी जरूरी है। सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और जनता की पहुंच के बीच यह संतुलन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, जिस पर इस घटना ने फिर से मोहर लगा दी है।
*IAS Officer: Do you have an appointment? Come back later.
— Dr. Rajeshwari Iyer (@RajeshwariRW) November 5, 2026
Taxpayer: You are a public servant not a private employee. Serving the people who pay your salary is your duty not a favour. pic.twitter.com/MCJM4C4jOe
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