पाकिस्तान और अमेरिका से फंडिंग का आरोप: क्राइम ब्रांच की पूछताछ के बाद कॉकरोच पार्टी के नेताओं का पलटवार
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर छिड़ा विदेशी फंडिंग का विवाद अब और गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा संगठन को पाकिस्तान और अमेरिका से आर्थिक मदद मिलने के दावों के बाद, पार्टी नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा पूछताछ के बाद सौरभ दास और आशुतोष रांका ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

आशुतोष रांका का तीखा सवाल: तब साथ बैठकर चाय क्यों पी? विदेशी फंडिंग के आरोपों पर आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से सीधा सवाल किया है। उन्होंने पूछा कि अगर CJP को पाकिस्तान या अमेरिका से पैसा मिल रहा था, तो नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान मंत्री ने उनके साथ हाथ क्यों मिलाया और उनके साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों किया? रांका ने इसे असल मुद्दों—जैसे बेरोजगारी और पेपर लीक—से ध्यान भटकाने की एक पुरानी राजनीतिक चाल करार दिया।

पुलिस पूछताछ पर क्या बोले CJP नेता? गुरुवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरभ दास और आशुतोष रांका से पूछताछ की। यह पूछताछ मुख्य रूप से 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और तिरंगा फहराने की घटना से संबंधित थी। आशुतोष रांका ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि वे किसी भी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक सड़क पर तिरंगा फहराना अपराध नहीं होना चाहिए।

सौरभ दास ने सबूतों पर उठाए सवाल सौरभ दास ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि आरोपों के पांच महीने बाद भी कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन के खिलाफ शुरुआत से ही सुनियोजित नकारात्मक प्रचार किया जा रहा है। दास ने स्पष्ट किया कि संगठन अपनी पारदर्शिता को लेकर आश्वस्त है और सरकार को अपने दावों का आधार स्पष्ट करना चाहिए।

मंत्री के आरोप और सरकारी दावों की सच्चाई केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया था कि उनके पास सबूत हैं कि संगठन को भारत विरोधी ताकतों और डीप स्टेट से पैसा मिल रहा है। हालांकि, मौजूदा स्थिति यह है कि क्राइम ब्रांच की जांच और विदेशी फंडिंग के आरोप दो अलग-अलग विषय बने हुए हैं।

फिलहाल, पुलिस की कार्रवाई 13 अक्टूबर के प्रदर्शन के उल्लंघन पर केंद्रित है, जबकि विदेशी फंडिंग के दावों पर अभी तक कोई कानूनी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस सियासी खींचतान में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई पुख्ता दस्तावेज पेश कर पाएगी।

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