नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लाए गए UGC के विवादित नियमों की फिर से समीक्षा होगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह इस मामले में छात्रों की चिंताओं को सुलझाने और सभी के हितों की रक्षा के लिए एक विशेष कमेटी बनाने पर विचार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि सरकार मामले के समाधान के लिए कमेटी गठित करने की प्रक्रिया में है। अदालत ने इस प्रक्रिया को देखते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है।
क्या है पूरा मामला? विवाद UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 को लेकर है, जिसे 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था। इनका मुख्य उद्देश्य परिसरों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना था।
क्यों मचा है विवाद? नियमों के लागू होते ही इनके प्रावधानों पर सवाल उठने लगे थे। विशेष रूप से नियम 3(1)(c) के तहत जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर विवाद हुआ। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह प्रावधान सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों के खिलाफ है और भेदभावपूर्ण है। इस पर आपत्तियां जताते हुए मामला अदालत पहुंचा था।
जनवरी में लगी थी रोक आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक 2012 के पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
रोहित वेमुला और पायल तड़वी का संदर्भ यह मामला 2019 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। इन दोनों छात्रों की दुखद मौत के बाद कॉलेजों में जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ सख्त नियमों की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब सरकार की नई कमेटी इस दिशा में एक संतुलित रास्ता तलाशने का प्रयास करेगी। हालांकि, कमेटी के गठन और नियमों में बदलाव को लेकर अभी अंतिम रूपरेखा आनी बाकी है।
The Centre has informed the Supreme Court that it is setting up a special committee to re-examine the UGC’s 2026 regulations on promoting equity in higher education institutions, whose implementation was stayed by the court in January.
— ANI (@ANI) November 5, 2026
Solicitor General (SGI) Tushar Mehta… pic.twitter.com/OQZkHm2lNS
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