वाराणसी: MSP पर धान बेचने का इंतजार खत्म, 39 केंद्रों पर खरीद शुरू; 48 घंटे में मिलेगा पैसा
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वाराणसी के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत जिले में धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए कुल 39 क्रय केंद्र स्थापित किए हैं, जहां किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेच सकेंगे। यह प्रक्रिया 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी।

40 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य

प्रशासन ने इस सत्र में जिले से 40 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश कुमार झा के अनुसार, सभी केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा, नमी मापक यंत्र, और बायोमेट्रिक डिवाइस जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों को तौल में कोई परेशानी न हो।

क्या हैं MSP के दाम?

सरकारी मानकों के अनुसार, सामान्य धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय किया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे धान को अच्छी तरह सुखाकर लाएं। केंद्र पर अधिकतम 17 प्रतिशत नमी वाला धान ही स्वीकार किया जाएगा। गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने पर नमी के नाम पर भुगतान में कोई कटौती नहीं की जाएगी।

पंजीकरण और जरूरी दस्तावेज

जिन किसानों के पास एग्रीस्टैक फार्मर आईडी है, उन्हें अलग से रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। बाकी किसान विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in या नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) के जरिए पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक (आधार और NPCI से लिंक) और खतौनी अनिवार्य है। बटाईदार किसान जमीन मालिक की सहमति से भी पंजीकरण करवा सकते हैं।

48 घंटे में भुगतान की गारंटी

प्रशासन ने भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। धान बेचने के 48 घंटे के भीतर PFMS के जरिए पैसा सीधे किसान के आधार लिंक बैंक खाते में पहुंच जाएगा। बिचौलियों और व्यापारियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। केंद्रों पर किसी भी प्रकार का शुल्क (तौल या मजदूरी) देने की आवश्यकता नहीं है।

धान वापस होने पर क्या करें?

यदि किसी केंद्र पर धान की गुणवत्ता पर सवाल उठाकर उसे वापस किया जाता है, तो किसान 48 घंटे के भीतर क्षेत्रीय विपणन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। विवाद की स्थिति में एक विशेष समिति फिर से धान की जांच करेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिचौलियों से धान की खरीद पूरी तरह प्रतिबंधित है और सभी केंद्रों की निगरानी जियो-टैगिंग के जरिए की जा रही है।

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