कोल्हापुर की प्रतिष्ठित गोकुल सहकारी दुग्ध उत्पादक संस्था में पांच सरकारी नामित निदेशक (Nominated Directors) की नियुक्ति का फैसला राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है। इस कदम को लेकर कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल और मंत्री प्रकाश आबिटकर आमने-सामने हैं।
सतेज पाटिल का आरोप: जनादेश को पलटने की साजिश सतेज पाटिल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान करार दिया है। पाटिल का दावा है कि सरकार जानबूझकर अध्यादेश जारी करने में देरी कर रही है ताकि उन्हें कानूनी चुनौती देने का मौका न मिले। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल गोकुल जैसी चुनिंदा संस्थाओं को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है, जबकि चीनी मिलों और जिला बैंकों को इससे बाहर रखा गया है।
बैकडोर से बहुमत हथियाने की कवायद? पाटिल के अनुसार, कोल्हापुर की जनता ने उनके पैनल को 25 में से 13 सीटें देकर स्पष्ट बहुमत दिया था। उनका आरोप है कि मंत्री हसन मुश्रीफ और चंद्रकांत पाटिल की सक्रिय भूमिका के चलते सरकार नियमों में बदलाव कर रही है ताकि नामित सदस्यों के जरिए बहुमत को अपने पक्ष में किया जा सके। उन्होंने इसे सहकारिता क्षेत्र के लिए एक काला दिन बताया।
प्रकाश आबिटकर का बचाव: कोरम की मजबूरी विवाद पर पलटवार करते हुए मंत्री प्रकाश आबिटकर ने सरकार के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई चालबाजी नहीं, बल्कि संस्था को बचाने का उपाय है। आबिटकर ने तर्क दिया कि गोकुल के उपनियमों के अनुसार, अध्यक्ष चुनाव के लिए 14 सदस्यों का कोरम अनिवार्य है।
संख्या बल का पेच आबिटकर ने कहा कि विपक्षी पैनल के पास 13 सदस्य हैं और सत्तापक्ष के पास 12, जिसके कारण कोई भी पक्ष कोरम पूरा नहीं कर पा रहा है। उनका कहना है कि यह स्थिति आगे चलकर प्रशासक (Administrator) बैठाने या दोबारा चुनाव कराने की नौबत ला सकती थी। उन्होंने चुनौती दी कि यदि विपक्षी खेमे के पास बहुमत है, तो वे कोरम पूरा करके अध्यक्ष चुनकर दिखाएं।
आगे क्या? यह पूरा मामला अब एक कानूनी और राजनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है। जहां एक ओर कांग्रेस इस नियुक्ति प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देने की तैयारी में है, वहीं महायुति सरकार इसे संस्था के सुचारू संचालन के लिए जरूरी कदम बता रही है। कोल्हापुर की इस सहकारी संस्था पर नियंत्रण की लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।
Mumbai, Maharashtra: On the Gokul Dairy election, Maharashtra Congress leader and MLC Satej Patil says, “This law has been formulated by keeping Gokul as its sole focus. An ordinance is being issued, and it may be issued tomorrow. While issuing this ordinance, when we talk about… pic.twitter.com/jMg50U9vaj
— IANS (@ians_india) November 5, 2026
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