संयुक्त राष्ट्र (UN) की प्रथम समिति में हाल ही में हुए एक मतदान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। पाकिस्तान और बेलारूस द्वारा पेश किए गए पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण के प्रस्ताव को 180 देशों का समर्थन मिला, जबकि भारत और इजरायल ने इसके खिलाफ मतदान किया। इस घटनाक्रम ने भारत के रणनीतिक साझेदार रूस के रुख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण करना था। भारत ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पारंपरिक हथियारों का मुद्दा वैश्विक है, न कि केवल क्षेत्रीय। भारत का मानना है कि सुरक्षा चुनौतियां भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहतीं, इसलिए उन्हें केवल क्षेत्रीय व्यवस्थाओं में बांधना गलत है।
भारत ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग को नए दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए कहा गया है। भारत ने स्पष्ट किया कि आयोग पहले ही 1993, 1999 और 2017 में इस पर सर्वसम्मत दिशा-निर्देश दे चुका है। भारत ने सवाल किया कि जो काम पहले ही हो चुका है, उसे फिर से शुरू करने का तुक क्या है?
पाकिस्तान का तर्क है कि पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास कम करने के लिए हथियारों की संख्या को न्यूनतम स्तर पर रखा जाना चाहिए। भारत इसे एक दबाव रणनीति मानता है। भारत का कहना है कि सैन्य क्षमताएं और रणनीतिक हित किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होते, इसलिए क्षेत्रीय सैन्य संतुलन की अवधारणा उसके लिए अव्यावहारिक और अस्वीकार्य है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत के करीबी सहयोगी रूस ने प्रस्ताव का समर्थन क्यों किया? विशेषज्ञों का मानना है कि इसे भारत के खिलाफ कूटनीतिक कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। रूस ने पूर्व में भी इसी तरह के प्रस्तावों का समर्थन किया है। यह रूस के हथियार नियंत्रण से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, न कि भारत के खिलाफ कोई नया रणनीतिक उलटफेर।
पाकिस्तान ने इसे अपनी बड़ी राजनयिक जीत बताते हुए कहा कि उसे 180 देशों का समर्थन मिला है। वहीं, भारत ने न केवल पूरे प्रस्ताव को नकारा, बल्कि उस विशिष्ट पैराग्राफ का भी विरोध किया जिसमें दक्षिण एशिया में हथियारों के नियंत्रण का जिक्र था। भारत ने साफ कर दिया है कि वह दक्षिण एशिया को किसी सीमित सैन्य नियंत्रण क्षेत्र के रूप में देखे जाने को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
निष्कर्ष: यह मतदान भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा के अलग-अलग नजरियों को स्पष्ट करता है। जहां पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय ढांचे में सीमित करना चाहता है, वहीं भारत अपनी सुरक्षा चुनौतियों को वैश्विक और वृहद रणनीतिक संदर्भ में देखता है।
#Bangladesh Amb. @hamidullah_riaz presented his Credentials to Amb. Tahir Hussain Andrabi, the President of the Conference on Disarmament (CD) in Geneva [#Pakistan Permanent Representative] today. They reflected on the CD’s functioning.#ConferenceOnDisarmament#Disarmament… pic.twitter.com/2h2Xkg0jvn
— Permanent Mission of Bangladesh, Geneva (@BDPM_Geneva) November 2, 2026
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