आरक्षण से लेकर Gen-Z के आंदोलनों तक: RSS की दो टूक, जानिए क्या बोले दत्तात्रेय होसबोले
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने इंदौर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद कई संवेदनशील और राष्ट्रीय मुद्दों पर संघ का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने संगठन के विस्तार से लेकर सामाजिक सरोकारों तक पर खुलकर अपनी बात रखी।

प्राकृतिक आपदा और सेवा कार्य होसबोले ने देश के विभिन्न हिस्सों में हालिया भारी बारिश और बाढ़ से हुई तबाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आपदा में जनहानि दुखद है। संघ के स्वयंसेवकों ने समाज और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर दुर्गम इलाकों में राहत कार्य पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है।

वोटर लिस्ट (SIR) पर क्या बोले? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का समर्थन करते हुए होसबोले ने इसे एक जरूरी प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि मृत व्यक्तियों और अपात्र लोगों के नाम हटाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने राजनीतिक दलों को नसीहत दी कि केवल विरोध के लिए इस प्रक्रिया का विरोध न करें। यदि कोई पात्र व्यक्ति बाहर होता है, तो उसके पास चुनाव आयोग और अदालत के दरवाजे खुले हैं।

Gen-Z और आरक्षण पर संघ की राय Gen-Z के आंदोलनों पर सरकार्यवाह ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं और गुस्से को समझने की जरूरत है, उन्हें देशविरोधी करार देना गलत है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए युवाओं को हिंसा और अराजकता की ओर धकेलने वाली ताकतों से सतर्क रहना होगा।

आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने संघ के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि जब तक सामाजिक और शैक्षणिक समानता नहीं आ जाती, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। वहीं, युवाओं के बीच बढ़ते नशे के खिलाफ संघ अब एक राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी में है।

संगठन का विस्तार और भविष्य की रूपरेखा होसबोले ने बताया कि संघ का काम अब 1,03,397 स्थानों तक पहुंच चुका है और देशभर में 99,423 दैनिक शाखाएं संचालित हैं। शताब्दी वर्ष के दौरान 65,664 हिंदू सम्मेलनों में 5 करोड़ लोगों की भागीदारी दर्ज की गई।

संगठनात्मक बदलाव पर उन्होंने जानकारी दी कि अब 46 प्रांतों के स्थान पर 88 संभागों के जरिए काम को और अधिक जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा।

काशी-मथुरा और अन्य मुद्दे काशी और मथुरा के विवादित मामलों पर होसबोले ने संयम बरतते हुए कहा कि हर मुद्दे पर आंदोलन करना समाधान नहीं है। इन मामलों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने परिवार और स्कूलों में संस्कार देने पर जोर दिया ताकि सोशल मीडिया की अश्लीलता से नई पीढ़ी को बचाया जा सके। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के त्याग और संसाधनों की बचत की भी अपील की।

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