वाराणसी में आयोजित आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान विषय पर वर्ल्ड सिंपोजियम में अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने एक नई दृष्टि पेश की। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये आज के दौर की जटिल समस्याओं—जैसे दुख, असमानता और वैश्विक संघर्ष—को सुलझाने की कुंजी हैं।
ज्ञान की सार्थकता उपयोगिता में है डॉ. अदाणी ने स्पष्ट किया कि किसी ज्ञान का महत्व उसके पुराने होने से नहीं, बल्कि वर्तमान की समस्याओं को हल करने की क्षमता से तय होता है। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास तकनीकी संसाधन तो पहले से कहीं ज्यादा हैं, लेकिन मानवीय दुख और सामाजिक असंतुलन कम नहीं हुए हैं। ऐसे में हमें वसुधैव कुटुंबकम जैसे सभ्यतागत मूल्यों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।
तीन सूत्रीय एजेंडा पर जोर अपने संबोधन में डॉ. अदाणी ने तीन मुख्य जिम्मेदारियों को रेखांकित किया:
योग और बाजरा: परंपरा का आधुनिक उदाहरण परंपराओं की प्रासंगिकता समझाने के लिए उन्होंने योग और बाजरे का उदाहरण दिया। योग, जो कभी भारत की विशिष्ट पद्धति थी, आज वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य का आधार बन गया है। इसी तरह, बाजरा अब पोषण और जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ खेती का सबसे प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि परंपराओं को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ना अनिवार्य है।
भारत नॉलेज ग्राफ से ज्ञान का पुनरुद्धार संस्कृति को केवल डिजिटल दस्तावेजों तक सीमित न रखने के लिए, डॉ. अदाणी ने भारत नॉलेज ग्राफ का उल्लेख किया। इस पहल के लिए अदाणी समूह ने 10 मिलियन डॉलर से अधिक का संकल्प लिया है। इसका उद्देश्य प्राचीन ग्रंथों को शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाना और अकादमिक मंचों पर उन पर गहन विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है।
सेवा का अर्थ है सशक्तिकरण डॉ. अदाणी ने सेवा की अपनी परिभाषा साझा करते हुए कहा कि विकास सिर्फ आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि लोगों के आत्मविश्वास से मापा जाना चाहिए। एक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने कहा कि अस्पताल की सफलता मरीजों को मिली उम्मीद से और स्कूल की सार्थकता वहां पढ़ने वाले छात्रों के आत्मविश्वास से तय होती है। उन्होंने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ लोगों को भविष्य के लिए सक्षम बनाना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका सिंपोजियम में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी डी. सैक्स ने कहा कि वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र एशिया की ओर स्थानांतरित हो रहा है। उन्होंने अनुमान जताया कि वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी, जो 2000 में 5.2% थी, 2100 तक 15.1% तक पहुंच सकती है। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने भी एआई (AI) के माध्यम से प्राचीन ग्रंथों को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर दिया।
*#WATCH | Varanasi, Uttar Pradesh: Dr Priti Adani, Chairperson of the Adani Foundation, gives an address at the World Symposium on Ancient Wisdom for Modern Challenges.
— ANI (@ANI) November 2, 2026
She says, ... Our Prime Minister Narendra Modi chose this holy city as his parliamentary constituency. Under… pic.twitter.com/hUyXqGrVTn
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