धार्मिक कथाओं के मंच से अक्सर कई बातें कही जाती हैं, लेकिन कभी-कभी शब्दों का चुनाव विवाद को जन्म दे देता है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना का विषय बना हुआ है। इसमें वे भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण के खड़े होने की मुद्रा पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भगवान राम सीधे खड़े होते हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर बांसुरी बजाते हैं।
उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि बांसुरी बजाना आसान है, लेकिन धनुष उठाना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद एक व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए माहौल को हंसी-मजाक वाला बनाने की कोशिश की।
आलोचकों का मानना है कि एक धार्मिक गुरु का मंच से भगवान के स्वरूपों के बीच तुलना करना और उन्हें टेढ़ा जैसे शब्दों से संबोधित करना शोभा नहीं देता। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि क्या अपनी बात रखने के लिए भगवान को एक-दूसरे से कमतर दिखाना जरूरी है?
वहीं, दूसरी ओर समर्थकों का तर्क है कि इसे केवल एक हास्य के तौर पर देखा जाना चाहिए। वे इसे भगवान की अलग-अलग मुद्राओं (मर्यादा पुरुषोत्तम बनाम लीला पुरुषोत्तम) को समझाने का एक अनौपचारिक तरीका बता रहे हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण की तीन जगह से मुड़ी हुई मुद्रा को त्रिभंग मुद्रा कहा जाता है, जो उनकी कला और सौंदर्य का प्रतीक है। वहीं श्रीराम मर्यादा के प्रतीक हैं। विद्वानों का मानना है कि दोनों भगवानों के स्वरूपों का अपना-अपना महत्व है। समस्या यह नहीं है कि उन्होंने क्या कहा, बल्कि वह लहजा है जिसे सुनकर कई भक्तों की आस्था आहत हुई है।
सोशल मीडिया पर इस बयान के बाद दो धड़े बन गए हैं। एक पक्ष इसे धार्मिक अपमान मानते हुए नाराजगी जता रहा है। दूसरा पक्ष इसे बेवजह की ट्रोलिंग करार दे रहा है।
तथ्य यह है कि किसी मंच पर बैठे सार्वजनिक व्यक्ति से जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। यदि भाषा से भावनाएं आहत हुई हैं, तो उस पर सवाल उठाना गलत नहीं है। लेकिन, बिना संदर्भ समझे अभद्र भाषा का प्रयोग करना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। यह घटना फिर एक बार यह याद दिलाती है कि आस्था के विषयों पर बात करते समय शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
*इंसानों को आपस में बाटने से काम नहीं चला तो
— Bharat Singh (@KRASHANKAN8171) November 1, 2026
अब भगवानो को भी बाट दिया।
धीरेन्द्र शास्त्री के अनुसार उनके भगवान सीधे खड़े होते हैं।अन्य लोगों के भगवान टेढ़े खड़े होते है।
मुरली बजाने वाले टेढ़े उनके धाम भी टेढ़े
क्या यही सभ्य भाषा हो सकती है।
एक आचार्य की जो हिंदू राष्ट्र की… pic.twitter.com/wCmhPzyLNh
लचकती कमर, टेढ़ी गर्दन : भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी कर घिरे धीरेंद्र शास्त्री, अब देनी पड़ी सफाई
यूपी में गुलाबी ठंड ने दी दस्तक, अगले 48 घंटे कैसा रहेगा मौसम?
अयोध्या दीपोत्सव 2026: एक लाख दीपों से जगमगाएगा राम मंदिर, 2100 ड्रोन से आसमान में दिखेगी रामायण
महादेव ऐप का सरगना सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार: दिल्ली पहुंचते ही दिखाया पुष्पा स्वैग, चेहरे पर नहीं दिखी शिकन
फ्लोरिडा में विमान का भयावह क्रैश: मिसाइल की तरह जमीन पर गिरा लियरजेट , 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत
फ्लोरिडा में रूह कंपाने वाला विमान हादसा: मिसाइल की तरह गिरा बिजनेस जेट, 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत
पति को पीठ पर ढोना पड़ा, तब जागी व्यवस्था: सीएम के दखल के बाद दिव्यांग को मिली ट्राइसाइकिल और आर्थिक मदद
गोरखपुर में सीएम योगी का सख्त तेवर: जनता दर्शन में समाधान न करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज
विराट कोहली का ‘विराट’ रिकॉर्ड: न्यूजीलैंड के खिलाफ 12 रन बनाते ही इतिहास रचेंगे किंग कोहली
जेडीयू में बढ़ा सियासी सस्पेंस: हार के बाद अभिषेक झा का बड़ा फैसला टला