भारत में नदियों को मां का दर्जा दिया जाता है, लेकिन अक्सर यही आस्था नदियों के लिए काल साबित हो रही है। धर्म के नाम पर नदियों में जो कुछ भी प्रवाहित किया जा रहा है, वह न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इसे अंधविश्वास का एक भयावह रूप भी माना जा रहा है।
विश्वास बनाम गंदगी का खेल हाल ही में असम के डिब्रूगढ़ से ब्रह्मपुत्र नदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो को नवीन रेड्डी नाम के यूजर ने साझा किया है। इसमें एक व्यक्ति नदी के किनारे खड़े होकर विधि-विधान से ब्रह्मपुत्र में दूध प्रवाहित करता दिख रहा है।
अजीबोगरीब हरकत: दूध के साथ डिब्बा भी भेंट धार्मिक रस्म तक तो बात समझ में आती है, लेकिन हद तब हो गई जब उस व्यक्ति ने दूध डालने के तुरंत बाद खाली प्लास्टिक का डिब्बा भी नदी में फेंक दिया। यह दृश्य इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे लोग अपनी आस्था के प्रदर्शन में प्रकृति के संरक्षण को पूरी तरह भूल जाते हैं।
क्या आस्था के नाम पर प्रदूषण जायज है? वीडियो साझा करते हुए नवीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने लिखा, धार्मिक रस्मों तक तो ठीक है, लेकिन विश्वास के नाम पर नदी में पहले दूध डालना और फिर उसका खाली पैकेट (डिब्बा) फेंक देना बिल्कुल गलत है। प्रकृति का सम्मान करना भी धर्म का ही हिस्सा होना चाहिए।
पर्यावरण और जलीय जीवों के लिए बड़ा खतरा विशेषज्ञों और नेटिजन्स का मानना है कि नदियों में इस तरह दूध प्रवाहित करना भी जलीय जीवों के लिए नुकसानदायक है, क्योंकि इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर बिगड़ सकता है। वहीं, प्लास्टिक के डिब्बों का जल में मिलना पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा है।
प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल वीडियो शेयर करने वाले यूजर ने यह भी उल्लेख किया है कि उन्हें ब्रह्मपुत्र के तट पर एक भी डस्टबिन नजर नहीं आया। यह प्रशासन की विफलता को भी दर्शाता है कि तीर्थस्थलों और नदी तटों पर स्वच्छता के बुनियादी इंतजाम तक नहीं किए गए हैं।
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा, धर्म के नाम पर नदियों को नाला बनाना बंद होना चाहिए। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि हम अपनी गलतियों का दोष सरकार पर मढ़ देते हैं, लेकिन अपनी निजी जिम्मेदारी कब समझेंगे? फिलहाल, यह वीडियो न केवल ब्रह्मपुत्र की सेहत पर बल्कि हमारी सोच पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
📍Brahmaputra River, Dibrugarh, Assam
— Naveen Reddy (@navin_ankampali) October 31, 2026
Pouring milk into the Brahmaputra as part of religious rituals is a matter of faith, but throwing the empty milk packets into the river afterwards is absolutely ridiculous. Respect your beliefs, but respect nature too.
Keep the Brahmaputra… pic.twitter.com/voliKbt0pz
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