हिंदी सिनेमा और डोगरी साहित्य जगत के लिए आज एक बेहद दुखद दिन है। मशहूर लेखक और निर्देशक वेद राही का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और 1 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के ठाणे स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
सादगी के साथ हुआ अंतिम संस्कार वेद राही का अंतिम संस्कार ठाणे के कोपारी श्मशान घाट में किया गया। उनके निधन की खबर से साहित्य और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके पिता ने 1924 में कश्मीर का पहला अखबार रणबीर शुरू किया था, जिससे उन्हें लेखन की विरासत मिली थी।
साहित्य अकादमी का बड़ा योगदान वेद राही आधुनिक डोगरी साहित्य के मजबूत स्तंभ माने जाते थे। उन्हें 1983 में उनके कहानी संग्रह आले के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था। हाल ही में, साल 2024 में उन्हें साहित्य अकादमी फेलोशिप (सर्वोच्च सम्मान) से सम्मानित किया गया था।
सिनेमाई सफर: लेखनी से निर्देशन तक वेद राही ने अपने करियर की शुरुआत 1966 में फिल्म ये रात फिर ना आएगी से एक स्क्रीनप्ले राइटर के तौर पर की थी। 1973 में उन्होंने प्रेम प्रभात फिल्म के साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। संन्यासी , चरस और शशि कपूर अभिनीत काली घटा जैसी फिल्मों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। 2001 में उन्होंने वीर सावरकर की बायोपिक का निर्देशन कर खूब सुर्खियां बटोरीं।
टीवी की दुनिया के जादूगर टेलीविजन जगत में वेद राही को उनके कालजयी सीरियल्स के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ उनका धारावाहिक गुल गुलशन गुलफाम आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके अलावा मीराबाई और जिंदगी जैसे सीरियल्स के जरिए उन्होंने दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई।
साहित्यिक विरासत लेखक के तौर पर उन्होंने काले हाथे , एक जर्नलिस्ट दी आत्मकथा और मौत और सोच जैसी कई कालजयी किताबें लिखीं। साहित्य अकादमी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से न केवल भारतीय साहित्य को, बल्कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई है। वे एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने अपनी कलम से डोगरी भाषा को नई ऊंचाई दी।
*Sahitya Akademi mourns the demise of eminent Dogri writer, thinker and filmmaker Ved Rahi Ji, a distinguished figure in modern Dogri literature. Honoured with the Sahitya Akademi Award in 1983 for his story collection Aale and the Akademi’s Fellowship, his invaluable contribution… pic.twitter.com/OOt1JefhuP
— Sahitya Akademi (@sahityaakademi) November 1, 2026
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