प्रवेश का समय और संभावित खतरा नासा की स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी (Swift Observatory) जल्द ही पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाली है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह 6 नवंबर, 2026 के आसपास धरती पर गिर सकता है। भारत उन देशों में शामिल है, जो इसके संभावित मलबे के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और अमेरिका के कुछ हिस्से भी इस गिरावट से प्रभावित हो सकते हैं।
बचाव का मिशन क्यों हुआ नाकाम? इस 1.4 टन वजनी टेलीस्कोप को बचाने के लिए कैटलिस्ट स्पेस कंपनी ने लिंक (Link) नामक रोबोटिक यान भेजा था। हालांकि, यान के एटीट्यूड कंट्रोल सिस्टम में खराबी आने के कारण यह मिशन विफल रहा। लिंक टेलीस्कोप के करीब नहीं पहुंच सका और सितंबर में खुद ही वायुमंडल में जलकर नष्ट हो गया। बचाव अभियान रद्द होने के बाद स्विफ्ट का विज्ञान मिशन भी आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।
क्या जमीन पर होगा बड़ा धमाका? नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, घबराइए नहीं। जब यह टेलीस्कोप वायुमंडल में प्रवेश करेगा, तो घर्षण और अत्यधिक गर्मी के कारण इसका अधिकांश हिस्सा जलकर राख हो जाएगा। हालांकि, टंगस्टन जैसी सख्त धातुओं से बने कुछ टुकड़े और दर्पण (मिरर) के हिस्से बच सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन टुकड़ों के समुद्र में गिरने की संभावना सबसे अधिक है, लेकिन जमीन पर भी प्रभाव की पूरी तरह अनदेखी नहीं की जा सकती।
ब्रह्मांड का वॉचडॉग था स्विफ्ट 20 नवंबर, 2004 को लॉन्च हुए इस टेलीस्कोप ने 22 साल का शानदार सफर तय किया। इसने 2,000 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट और 1,400 सुपरनोवा का पता लगाया। इसका नाम स्विफ्ट इसलिए पड़ा था क्योंकि यह अंतरिक्ष की घटनाओं की ओर पलक झपकते ही मुड़ सकता था। इसने हबल और जेम्स वेब जैसे बड़े टेलीस्कोपों के लिए एक अर्ली-वार्निंग सिस्टम (शुरुआती चेतावनी प्रणाली) के रूप में भी बेहतरीन काम किया।
क्यों लौट रहा है वापस? किसी भी उपग्रह का निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में हमेशा बने रहना असंभव है। वायुमंडलीय खिंचाव (Atmospheric drag) धीरे-धीरे इनकी गति को कम कर देता है, जिससे ये पृथ्वी की ओर खींचने लगते हैं। सौर तूफानों के कारण हाल के वर्षों में यह खिंचाव और बढ़ गया था, जिससे स्विफ्ट की वापसी तय हो गई। नासा की टीम लगातार इसकी कक्षा पर नजर बनाए हुए है।
Since launching on November 20, 2004, Swift observed:
— NASA Universe (@NASAUniverse) October 26, 2026
More than 2,000 gamma-ray bursts
More than 1,400 supernovae
Stars being shredded by black holes
Asteroids and comets
… and so much more! pic.twitter.com/JLpZI5vLrr
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