अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा : यूपी में ओवैसी की हुंकार, अखिलेश-कांग्रेस के लिए सिरदर्द बनी मुस्लिम राजनीति
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उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सपा और कांग्रेस के परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक पर सीधा हमला बोलते हुए यूपी में अपनी सक्रियता तेज कर दी है।

अब्दुल को लेकर छिड़ी बहस सियासत में अब्दुल शब्द का इस्तेमाल एक मेटाफर के तौर पर किया जा रहा है, जिसे लेकर सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि किसी समुदाय को इस नाम से बुलाकर उनका मजाक उड़ाना गलत है। हालांकि, ओवैसी इसे एक बड़े मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।

गिरी हुई दरी से संसद तक की लड़ाई ओवैसी का मुख्य नैरेटिव ये है कि दशकों से मुस्लिम समाज अन्य दलों के नेताओं (नेहरू-गांधी या यादव परिवार) के लिए सिर्फ दरी बिछाने, वोट देने और जेल जाने का काम करता रहा है। उनका कहना है कि अब वक्त आ गया है कि मुस्लिम अपनी खुद की लीडरशिप तैयार करें। ओवैसी का दावा है कि उनके जरिए मुस्लिम नौजवानों को वह मंच मिल रहा है, जिसकी उन्हें दशकों से दरकार थी।

यादव परिवार पर सीधा निशाना शामली के कैराना में ओवैसी ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का नाम समाजवादी से बदलकर समाजवादी यादव परिवार कर देना चाहिए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि आजमगढ़, बदायूं और फिरोजाबाद जैसी मुस्लिम बहुल सीटों पर अब मुस्लिम उम्मीदवार की जगह यादव परिवार के सदस्य कब्जा जमा रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अब मुस्लिम किसी गांधी या यादव के लिए कुर्बानी नहीं देंगे।

सपा-कांग्रेस का पलटवार ओवैसी के आरोपों को सपा और कांग्रेस ने खारिज किया है। सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने ओवैसी पर विभाजनकारी एजेंडा चलाने का इल्जाम लगाया है। वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने ओवैसी पर मुसलमानों का ठेकेदार बनने का आरोप जड़ दिया है।

कांग्रेस ने तेलंगाना का उदाहरण देते हुए ओवैसी से सवाल पूछा कि अगर वे अलग मुस्लिम लीडरशिप चाहते हैं, तो अपने ही गृह राज्य में वे मात्र 9 सीटों पर क्यों लड़ते हैं? कांग्रेस का दावा है कि ओवैसी की राजनीति का फायदा अंततः बीजेपी को ही मिलता है।

2027 में क्या होगा असर? उत्तर प्रदेश में लगभग 19% मुस्लिम आबादी है। 2022 के चुनाव में ओवैसी की पार्टी को महज 0.49% वोट मिले थे, लेकिन बिहार के सीमांचल में मिली सफलता के बाद उनका हौसला बढ़ा है। ओवैसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे बीजेपी को रोकने के लिए गठबंधन को तैयार हैं, लेकिन वे मुस्लिमों को किसी की बपौती नहीं बनने देंगे।

आगामी चुनावों में ओवैसी का यह रुख सपा और कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि मुस्लिम वोटों का बिखराव सीधे तौर पर विपक्ष के PDA फॉर्मूले को कमजोर कर सकता है।

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