बदरीनाथ से लौटते समय बड़ा हादसा: हेलीकॉप्टर क्रैश में 6 लोगों की मौत, मातम में बदली चारधाम यात्रा
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खुशियों से भरी थी यात्रा, आखिरी इच्छा अधूरी रह गई कर्नाटक से आए पांच श्रद्धालु बड़े उत्साह के साथ भगवान बदरी विशाल के दर्शन करने पहुंचे थे। बदरीनाथ धाम और अंतिम गांव माना घूमने के बाद उनका मन जल्द घर लौटने का था। गुरुवार को उन्होंने गाइड से पूछा था— क्या हम आज ही वापस लौट सकते हैं? लेकिन खराब मौसम ने उनकी इस ख्वाहिश पर ब्रेक लगा दिया। उन्हें क्या पता था कि शुक्रवार की उनकी वापसी की उड़ान जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी।

जोशीमठ के पास टूटी डोर, पहाड़ी से टकराया हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर करीब 1:14 बजे ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर बदरीनाथ से देहरादून के लिए उड़ान भर चुका था। करीब एक घंटे बाद जोशीमठ घाटी के ऊपर हेलीकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया और ट्रैकिंग सिस्टम भी फेल हो गया। सेना, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमों ने सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद चाई गांव के पास मारवाड़ी पुल और जेपी पावर हाउस के करीब पहाड़ी पर हेलीकॉप्टर का मलबा मिला।

हादसे में छह जिंदगियां खत्म इस दर्दनाक हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में बेंगलुरु (कर्नाटक) के पाँच यात्री—प्रताप, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराज शामिल हैं। हेलीकॉप्टर उड़ा रहे कैप्टन हिमांशु दिल्ली के निवासी थे। प्रशासन के अनुसार, दुर्घटनास्थल से सभी छह शव बरामद कर लिए गए हैं, हालांकि उन्हें नीचे लाने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण रही।

कंपनी के सभी हेलीकॉप्टर्स को किया गया ग्राउंडेड घटना के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े को ग्राउंडेड कर दिया है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम हादसे के कारणों की जांच के लिए मौके पर पहुंच चुकी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तकनीकी खराबी थी या खराब मौसम की वजह से हेलीकॉप्टर अनियंत्रित हुआ।

कर्नाटक सरकार ने दिया मदद का आश्वासन हादसे की खबर मिलते ही कर्नाटक सरकार ने उत्तराखंड प्रशासन के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। सरकार ने मृतकों के पार्थिव शरीरों को जल्द से जल्द उनके घर पहुंचाने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। एक धार्मिक यात्रा जो शांति और आशीर्वाद की उम्मीद में शुरू हुई थी, वह एक ऐसी त्रासदी में बदल गई जिसने छह परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।

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