चर्चा में बनासकांठा: पीएम मोदी ने कहा, खाट पर बैठे लोगों का यह दृश्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बन सकता था
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में एक भव्य जनसभा को संबोधित किया। इससे पहले भिलडी कस्बे में उनका जोरदार रोड शो हुआ, जहां उन्होंने 14 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

खाट पर बैठे लोग, पुनर्जीवित हुई परंपरा जनसभा में प्रधानमंत्री का ध्यान लोगों के बैठने के अनोखे अंदाज पर गया। वहां मौजूद सभी लोग कुर्सियों के बजाय चारपाइयों (खाट) पर बैठे थे। इसे देख पीएम मोदी ने कहा, यह देश के लिए हैरानी की बात होगी। बनासकांठा ने हमारी पुरानी ग्रामीण परंपरा को फिर से जीवित किया है। अगर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स वालों को इसके बारे में पता चलता, तो वे इसे एक विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कर लेते।

खेती में तकनीक और सॉइल हेल्थ कार्ड की अहमियत प्रधानमंत्री ने कहा कि खेती हमारी संस्कृति है। बीते 12 वर्षों में सरकार ने कृषि में विज्ञान और तकनीक को जोड़ा है। उन्होंने सॉइल हेल्थ कार्ड को गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि देशभर में अब तक 26 करोड़ से अधिक कार्ड बांटे जा चुके हैं। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिली है कि उनके खेतों को किस खाद की जरूरत है।

किसानों को मिली नई सौगातें बदलते मौसम की चुनौती पर चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि किसानों को जलवायु के अनुकूल बीजों की 3,000 नई किस्में उपलब्ध कराई गई हैं। वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं आने दिया। उन्होंने बताया कि पीएम-किसान सम्मान निधि के जरिए छोटे किसानों को अब तक 4.5 लाख करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में भेजे गए हैं।

रोड शो में दिखा जनता का समर्थन जनसभा से पहले पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के साथ खुली जीप में रोड शो किया। इस दौरान सड़क के किनारे भीड़ ने उनका भव्य स्वागत किया। लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था कि जब तक भारत विकसित और आत्मनिर्भर नहीं हो जाता, तब तक मोदी कहीं नहीं जाएंगे।

राजनीतिक नारों का जवाब सड़क पर दिख रहे ये नारे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हालिया विवादित टिप्पणी के जवाब के तौर पर देखे जा रहे हैं। खड़गे ने हाल ही में पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था, जिस पर देश भर में राजनीतिक हलचल मच गई थी। बनासकांठा में लोगों का यह उत्साह उसी टिप्पणी के खिलाफ एक मौन लेकिन कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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