मोदी सरकार का बड़ा दावा: 12 साल में 50 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर
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ऐतिहासिक उपलब्धि का दावा भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 12 वर्षों में लगभग 50 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर इस आंकड़े को साझा करते हुए इसे इतिहास में किसी भी सरकार द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा कार्य बताया है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट का आधार यह दावा वर्ल्ड बैंक की एक हालिया रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच भारत ने आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों पैमानों पर गरीबी कम करने में अभूतपूर्व प्रगति की है। आंकड़ों के मुताबिक, 4.20 डॉलर प्रतिदिन की आय सीमा (निम्न-मध्यम आय वर्ग) के नीचे रहने वाली आबादी का हिस्सा 57.7% से घटकर 16.1% रह गया है, जिससे करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए हैं।

अत्यधिक गरीबी में बड़ी गिरावट रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि देश में अत्यधिक गरीबी (3.00 डॉलर प्रतिदिन से कम आय) का स्तर 27.1% से गिरकर मात्र 2.6% पर आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दुनिया में गरीबी में आई सबसे तेज गिरावटों में से एक है। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2028 तक गरीबी दर घटकर 12.1% तक पहुंच सकती है।

विकास के पीछे प्रमुख कारक इस बड़ी कामयाबी के पीछे खपत में मजबूत वृद्धि, रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी (विशेषकर महिलाओं के लिए) और खाद्य सब्सिडी जैसे सामाजिक कल्याणकारी कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार की ओर से कहा गया है कि आम जनता धरने-प्रदर्शन के बजाय विकास को प्राथमिकता देती है, जिसका परिणाम चुनावी जनादेश में भी दिखता है।

चुनौतियां अभी भी बरकरार हालांकि भारत ने गरीबी उन्मूलन में लंबी छलांग लगाई है, लेकिन रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया गया है। वर्तमान में वेतन में असमानता अभी भी एक प्रमुख चिंता है। आंकड़ों के अनुसार, 2023 में शीर्ष 10 प्रतिशत कमाई करने वाले श्रमिकों की औसत आय, सबसे निचले 10 प्रतिशत श्रमिकों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक रही। साथ ही, कम शिक्षा और स्थिर रोजगार का अभाव अभी भी उन परिवारों के लिए बाधा बना हुआ है जो अब भी गरीबी रेखा के करीब हैं।

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