नामों की लिस्ट बना रहा हूं, किसी को बख्शा नहीं जाएगा : अभिषेक बनर्जी की पुलिस को खुली चेतावनी
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी का एक बयान इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता ने राज्य पुलिस के अधिकारियों को सीधे तौर पर निशाने पर लिया है और भविष्य के लिए सख्त चेतावनी जारी की है।

पुलिस अधिकारियों को चेतावनी अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि राज्य के पुलिसकर्मी सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहे हैं और अनावश्यक रूप से टीएमसी कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी केवल अपने आला अधिकारियों या सत्ता से जुड़े लोगों को खुश करने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज कर रहे हैं।

बनर्जी ने तल्ख लहजे में कहा, मैं उन सभी पुलिस अधिकारियों के नामों की एक लिस्ट तैयार कर रहा हूं जो मुख्यमंत्री या भाजपा नेताओं के इशारे पर काम कर रहे हैं। मैं सबका नाम रिकॉर्ड में रख रहा हूं। जब सत्ता बदलेगी, तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें इसका सबक सिखाया जाएगा।

विशिष्ट अधिकारियों पर निशाना अभिषेक ने पश्चिमी मेदिनीपुर के एक आईपीएस अधिकारी का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो अधिकारी चुनाव से पहले उन्हें जीत की बधाई दे रहे थे, अब वे सत्ता के दबाव में आकर पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। बनर्जी ने दावा किया कि अगले दो साल के भीतर ही ऐसे अधिकारियों का हिसाब होना शुरू हो जाएगा।

चोरबागान भगदड़ पर तीखे सवाल यह पूरा विवाद चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दुखद भगदड़ के बाद और गरमा गया है। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई थी। अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में भाजपा नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने मांग की है कि पूजा समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक विजय ओझा, जिला अध्यक्ष तमोघ्न घोष और संरक्षक देवदीप अधिकारी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाए। उन्होंने सवाल किया कि अब तक इन लोगों से पूछताछ क्यों नहीं हुई?

एसआईटी जांच पर सवाल बनर्जी ने आशंका जताई है कि राजनीतिक रसूख के कारण मामले की जांच प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि महज कुछ छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार करके इस हादसे की जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, जिसमें आयोजकों की निर्णय लेने की प्रक्रिया और सुरक्षा खामियों की पूरी जांच हो।

यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव को एक नए स्तर पर ले गया है, जहाँ पुलिस की भूमिका पर ही सीधा सवाल खड़ा कर दिया गया है।

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