चक्रवात अर्नब का तांडव: दिल्ली-यूपी समेत 19 राज्यों में हाई अलर्ट, 150 किमी की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं
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नई दिल्ली: देश पर एक बार फिर कुदरत का बड़ा संकट मंडरा रहा है। समुद्र में उठा चक्रवाती तूफान अर्नब तेजी से जमीन की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक देश के 19 राज्यों में भारी तबाही की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसे लेकर कड़ा अलर्ट जारी किया है।

150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा तूफान

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अर्नब के प्रभाव से हवा की गति 90 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इतनी तेज रफ्तार से कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को भारी नुकसान हो सकता है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत पर सीधी मार

चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर की दोपहर से पहले आंध्र प्रदेश के यनम तटीय क्षेत्रों को पार करेगा। बापटला और विशाखापत्तनम के बीच यह एक बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में टकराएगा। विशाखापत्तनम, काकीनाडा, मछलीपट्टनम और गुंटूर समेत तेलंगाना और कर्नाटक में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट है।

दिल्ली-NCR में ओलावृष्टि और तापमान में गिरावट

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में 28-29 अक्टूबर को तूफानी हवाओं के साथ जोरदार बारिश और ओले गिरने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिन और रात के तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है, जिससे अचानक कड़ाके की ठंड का अहसास होगा।

यूपी, बिहार और पहाड़ी राज्यों का हाल

मध्य और पश्चिमी भारत पर असर

मध्य प्रदेश में 31 अक्टूबर तक भारी बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि का अलर्ट है। छत्तीसगढ़ में भी बादलों की गड़गड़ाहट और तेज आंधी का साया रहेगा। वहीं, महाराष्ट्र और गुजरात में 29-30 अक्टूबर को चक्रवात का व्यापक असर देखने को मिलेगा।

पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी

ओडिशा में चक्रवात के सबसे करीब होने के कारण 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफान का खतरा है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में भी मूसलाधार बारिश और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।

प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे कमजोर इमारतों या पेड़ों के नीचे न खड़े हों और मौसम विभाग की अपडेट्स पर लगातार नजर बनाए रखें।

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