दुनिया का वो छोटा सा देश, जहां 30 मिनट में घूमते हैं पूरा मुल्क; प्रिंस एलॉइस के भारत दौरे के क्या हैं मायने?
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नई दिल्ली: ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच आल्प्स की वादियों में बसा लिकटेंस्टीन (Liechtenstein) भले ही क्षेत्रफल में छोटा हो, लेकिन दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में इसकी गिनती होती है। अब इस देश के युवराज प्रिंस एलॉइस भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया गया।

30 मिनट का सफर और दांतों का साम्राज्य लिकटेंस्टीन की भौगोलिक स्थिति चौंकाने वाली है। आप महज 30 मिनट तक लगातार गाड़ी चलाकर इस पूरे देश को पार कर सकते हैं। केवल 160 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश की एक और अनोखी खासियत इसका दंत चिकित्सा उद्योग है। दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम दांतों का 20 प्रतिशत हिस्सा लिकटेंस्टीन की कंपनी इवोक्लार विवाडेंट ही बनाती है।

अमीरी और सुरक्षा का अभेद्य किला 40 हजार की आबादी वाला यह देश टैक्स हेवन के रूप में जाना जाता है, जहाँ कंपनियों की संख्या लोगों से भी अधिक है। लिकटेंस्टीन की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि देश पर एक रुपये का भी कर्ज नहीं है और बेरोजगारी दर 2 फीसदी से भी कम है।

इसकी सुरक्षा व्यवस्था भी निराली है। 1868 में ही इन्होंने अपनी सेना खत्म कर दी और सुरक्षा के लिए स्विट्जरलैंड पर निर्भर हैं। यहां क्राइम रेट शून्य के बराबर है। लोग अपने घरों के दरवाजों पर ताला तक नहीं लगाते, और यदि किसी को 2 साल से अधिक की सजा होती है, तो उसे पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया की जेल में भेज दिया जाता है।

प्रिंस का दौरा क्यों है अहम? प्रिंस एलॉइस अपनी पत्नी प्रिंसेस सोफिया और एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचे हैं। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

यह दौरा भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साल 2025 में भारत-ईएफटीए (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता लागू होने के बाद यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, निवेश और व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई देने का अवसर है।

भारत के साथ गहराते संबंध प्रिंस एलॉइस का भारत के साथ पुराना नाता है। इससे पहले वह 2010 और 2018 में भी दौरा कर चुके हैं। फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट के बाद यह इस साल उनकी दूसरी भारत यात्रा है। यह संकेत देता है कि तकनीक से लेकर व्यापार तक, लिकटेंस्टीन भारत को भविष्य के एक प्रमुख रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है।

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