अमेरिका से दूरी या नई रणनीति? ईरान, रूस, भारत और UAE के बदलते समीकरण
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मिडिल ईस्ट और उसके पड़ोसी क्षेत्रों की जियोपॉलिटिक्स अब किसी एक महाशक्ति के दबाव में काम नहीं कर रही है। ईरान पर बढ़ते अमेरिकी दबाव और क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के बीच एक नई कहानी लिखी जा रही है, जिसका मूल मंत्र है— बहु-ध्रुवीय संतुलन । दुनिया के ये देश अब किसी एक ताकत के आगे झुकने के बजाय अपने रणनीतिक और आर्थिक विकल्पों का दायरा बढ़ा रहे हैं।

ईरान और रूस: प्रतिबंधों के बीच अटूट होती दोस्ती

तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मुलाकात केवल कूटनीतिक नहीं थी। अराघची ने साफ किया कि दोनों देशों के संबंध अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई को अवैध ठहराकर दोनों ने पश्चिमी प्रतिबंधों को चुनौती दी है। 730 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना और रणनीतिक साझेदारी समझौते पर काम शुरू होना यह साबित करता है कि वे कैस्पियन सागर और INSTC गलियारे के जरिए एक वैकल्पिक व्यापारिक और सुरक्षा घेरा बना रहे हैं।

इंडिया-फर्स्ट और राजनाथ सिंह का स्पष्ट संदेश

ताजिकिस्तान में SCO बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के इरादे स्पष्ट कर दिए। उन्होंने चाबहार पोर्ट और INSTC की वकालत करते हुए इसे अमेरिका विरोधी नहीं, बल्कि भारत केंद्रित रणनीति बताया। पाकिस्तान द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद, चाबहार भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंचने की लाइफलाइन है। राजनाथ सिंह का यह कहना कि कनेक्टिविटी संप्रभुता का सम्मान करने वाली होनी चाहिए , चीन की BRI नीति पर तंज था और दुनिया को संदेश कि भारत अपने व्यापारिक हितों के लिए किसी के दबाव में नहीं आएगा।

भारत और UAE: आर्थिक सुरक्षा का नया स्तंभ

एक तरफ तेहरान में ध्रुवीकरण हो रहा था, तो दूसरी तरफ मुंबई में भारत और UAE के रिश्ते और मजबूत हुए। यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का दौरा यह दर्शाता है कि पश्चिम एशिया का यह आर्थिक केंद्र अब पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ भारत जैसे उभरते बाजारों में अपना भविष्य सुरक्षित कर रहा है। भारत के साथ ऊर्जा, निवेश और लॉजिस्टिक्स का नेटवर्क बनाना यूएई की उस रणनीति का हिस्सा है, जो उसे वैश्विक मंदी और तेल संकट से बचाकर रखती है।

निष्कर्ष: एक ध्रुव की निर्भरता का अंत

इन घटनाओं का मतलब यह नहीं है कि ये देश अमेरिका के खिलाफ कोई सैन्य गुट बना रहे हैं। इसका सही अर्थ यह है कि अनिश्चित दौर में सिर्फ एक देश पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। रूस और ईरान अपने अस्तित्व के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं, भारत अपनी सुरक्षा और व्यापार में संतुलन बनाए हुए है, और यूएई आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले दशक में वही देश और अर्थव्यवस्थाएं सुरक्षित रहेंगी, जो किसी एक महाशक्ति की कठपुतली बनने के बजाय अपनी शर्तों पर रणनीतिक विकल्प खुले रखेंगी।

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