नई दिल्ली: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर पिछले एक महीने से गरमाया विवाद आज सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका पर शीर्ष अदालत आज सुनवाई करेगी। इस मामले में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
विपक्ष की मांग: पारदर्शिता और जांच याचिकाकर्ता विपक्षी नेताओं की मुख्य मांग है कि SIR प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग के हालिया फैसलों की निष्पक्ष जांच और इससे संबंधित सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। 15 अक्टूबर को हुई पिछली सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था।
चुनाव आयोग का रुख: सभी फैसले सर्वसम्मत सुनवाई से ठीक एक दिन पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर अपना बचाव किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जून 2025 से मई 2026 के बीच लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ दोनों आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन फैसलों पर सहमति जताई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर तीनों के हस्ताक्षर हैं।
फॉर्म-6 विवाद और सरकार की भूमिका विवाद की जड़ एक मीडिया रिपोर्ट है, जिसमें दावा किया गया था कि फॉर्म-6 में बदलाव की जानकारी अन्य आयुक्तों से छिपाई गई थी। इस पर चुनाव आयोग ने दो-टूक जवाब दिया है। आयोग का कहना है कि नियमों के अनुसार फॉर्म में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। आयोग के अनुसार, SIR में मांगा गया डिक्लेरेशन एक अलग दस्तावेज है, न कि फॉर्म-6 का संशोधन।
मीडिया रिपोर्ट को बताया निराधार चुनाव आयोग ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी याचिका केवल एक अखबार की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे कानूनन सबूत नहीं माना जा सकता। आयोग का तर्क है कि इस आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के काम करने पर रोक लगाना उचित नहीं है।
आयोग के भीतर खींचतान के आरोप यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरें सुर्खियों में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों ने 14 बार विभिन्न फैसलों पर असहमति जताई है और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। आज होने वाली सुनवाई में अदालत का रुख तय करेगा कि क्या भविष्य में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कोई नई निगरानी व्यवस्था लागू होगी या नहीं।
The Election Commission of India filed an affidavit before the Supreme Court saying all three SIR orders issued in June 2025, October 2025 and May 2026 were unanimous decisions.
— ANI (@ANI) October 26, 2026
Affidavit filed on the petitions questioning the Chief Election Commissioner’s functioning.
The ECI… pic.twitter.com/OlwDepOu3F
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