भीमाशंकर के जंगलों पर संकट: वडेट्टीवार ने सरकार पर लगाया गुजरात के उद्यमियों को लाभ पहुंचाने का आरोप
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भीमाशंकर के जंगलों में प्रस्तावित बिजली परियोजना को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि गुजरात के उद्यमियों को फायदा पहुंचाने के लिए रायगढ़ जिले के भीमाशंकर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की जा रही है।

पर्यावरण और जैव विविधता को खतरा वडेट्टीवार ने चेतावनी दी है कि इस परियोजना से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि यह जंगल शेकरू (भारतीय विशाल गिलहरी) का प्राकृतिक आवास है, जो कि महाराष्ट्र का राज्य प्राणी भी है। इसके अलावा, यह इलाका कई महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने औद्योगिक परियोजना के लिए किसी बंजर भूमि का विकल्प क्यों नहीं चुना।

क्षतिपूर्ति पर उठे सवाल सरकार द्वारा पर्यावरण की भरपाई के लिए 90,000 पेड़ लगाने की योजना पर निशाना साधते हुए वडेट्टीवार ने इसे छलावा बताया। उन्होंने पूछा, क्या नया वृक्षारोपण रातों-रात पुराने जंगल और उसकी सदियों पुरानी जैव विविधता की जगह ले सकता है? उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इस विनाशकारी परियोजना के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।

कंपनी का क्या है रुख? विवाद के केंद्र में मौजूद टोरेंट पावर ने अपने बचाव में स्पष्ट किया है कि उनकी प्रस्तावित 3,000 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से लगभग 16 किलोमीटर दूर है। कंपनी का दावा है कि यह परियोजना अभयारण्य के किसी भी संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र को प्रभावित नहीं करेगी।

नांदेड़ की घटना और अन्य सियासी हमले वडेट्टीवार ने नांदेड़ में एक किसान की आत्महत्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों ने किसान को प्रताड़ित किया, जिससे तंग आकर उसने अपनी जान दे दी। उन्होंने पुलिस पर भी मामले को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

इसके साथ ही, उन्होंने नागपुर में होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की तैयारियों पर हो रहे भारी खर्च को फिजूलखर्ची बताया। भाजपा पर हमलावर रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल को विपक्ष की आलोचना करने से पहले अपने नेताओं के पुराने बयानों का आत्मचिंतन करना चाहिए।

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