जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन पिछले दो हफ्तों से जारी है। प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए एक आधिकारिक आदेश जारी किया, लेकिन छात्रों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। भूख हड़ताल और प्रदर्शन अभी भी थमा नहीं है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सोमवार को एक आदेश जारी कर दावा किया कि छात्रों के साथ सहमति बन गई है। प्रशासन के अनुसार, छात्र संघ संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इसके अलावा, जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को दोबारा बहाल करने पर भी रजामंदी हुई है।
प्रशासन की घोषणा के बावजूद, छात्र विरोध खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक चुनाव की कोई पक्की तारीख घोषित नहीं की जाती, तब तक वे प्रदर्शन से नहीं हटेंगे। छात्रों को डर है कि सिर्फ 15 दिनों की समय सीमा कहना काफी नहीं है, प्रशासन को स्पष्ट तिथि देनी होगी।
प्रदर्शन के 14वें दिन स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। रविवार दोपहर सेंट्रल मस्जिद के पास छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हाथापाई हुई। छात्रों का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस गाड़ियों में बैठाकर ले जाया गया। हंगामे के दौरान कई छात्रों को यूनिवर्सिटी की दीवारें फांदकर अंदर जाते देखा गया।
जामिया में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा काफी पुराना है। साल 2006 में तत्कालीन प्रशासन ने छात्र संघ को भंग कर दिया था, जिसके बाद से यहां चुनाव नहीं हुए हैं। करीब दो दशक बाद चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हुई है, लेकिन प्रशासन के वादों और छात्रों के विश्वास के बीच की खाई अभी भी गहरी बनी हुई है।
छात्रों ने अपनी दो बड़ी मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं:
इन शर्तों के पूरा होने तक छात्रों ने भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क गई है। इस परियोजना के विरोध में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी नेताओं के घरों को निशाना बनाया और वहां जमकर तोड़फोड़ की।
हिंसा के बढ़ते दायरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के त्वरित प्रतिक्रिया बल (RAF) की दो कंपनियां राज्य में भेजी हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण और स्थानीय लोगों के विस्थापन के लिहाज से बेहद घातक है।
Jamia Millia Islamia announces resumption of student union elections after two decades. In an order issued on Monday, the university administration said the elections would be held within 15 days of the approval of the students’ union constitution.
— ANI (@ANI) October 26, 2026
“The Jamia Millia Islamia… pic.twitter.com/b96A3LWuIy
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